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एक नजर से शुरू होकर कुर्बानी पर खत्म होता है प्यार, इस डायरेक्टर की फिल्मों में छिपे हैं मोहब्बत के ये 7 राज
बॉलीवुड के इस डायरेक्टर फिल्मों में प्यार के 7 पड़ाव दिलकशी, लगाव, मोहब्बत, भरोसा, इबादत, जुनून और मौत. जानिए उनकी फिल्मों में प्यार के अलग-अलग रंग कौनसे हैं?
हिंदी सिनेमा का वो डायरेक्टर जिसकी फिल्में सिर्फ अपनी भव्यता, शानदार सेट और खूबसूरत संगीत के लिए नहीं जानी जाती, बल्कि उनकी कहानियों में प्यार का एक अलग ही रंग देखने को मिलता है. यह कभी पहली नजर का अट्रैक्शन, तो कभी जुनून की हद पार कर जाता है. उनकी फिल्मों में मोहब्बत एक सफर की तरह है, जो धीरे-धीरे गहराती है और कई बार कुर्बानी तक पहुंच जाती है. जो दर्शकों तक के होश उड़ा देती है, लेकिन उनके हर प्यार के रंग की अलग कहानी होती है जिसका मकसद भी अलग ही होता है.
'सांवरिया' में दिलकशी
हम बात कर रहे हैं, संजय लीला भंसाली की जिनकी फिल्मों में प्यार के कई रंग देखने को मिलते हैं. प्यार की शुरुआत अक्सर एक नजर या छोटी सी मुलाकात से होती है. 'सांवरिया' में भंसाली ने इसी मासूम आकर्षण को खूबसूरती से दिखाया. दो अनजान लोगों के बीच पैदा होने वाली पहली हलचल इस पड़ाव की पहचान है.
'हम दिल दे चुके सनम' में लगाव
जब किसी की मौजूदगी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा लगने लगे, तो आकर्षण लगाव में बदल जाता है. 'हम दिल दे चुके सनम' में नंदिनी और समीर का रिश्ता इसी पड़ाव को दिखाता है. उनकी मस्ती और दोस्ती धीरे-धीरे गहरे भावनात्मक रिश्ते में बदल जाती है.
'गोलियों की रासलीला राम-लीला' में मोहब्बत
इसके बाद आती है असली मोहब्बत. 'गोलियों की रासलीला राम-लीला' में राम और लीला का रिश्ता इसका उदाहरण है. दोनों का प्यार इतना मजबूत है कि उनके आसपास की दुश्मनी भी उसे रोक नहीं पाती.
'बाजीराव मस्तानी' में भरोसा
प्यार जब भरोसे में बदल जाए, तो रिश्ता और मजबूत हो जाता है. 'बाजीराव मस्तानी' में बाजीराव और मस्तानी का रिश्ता समाज के विरोध के बावजूद कायम रहता है. दोनों एक-दूसरे के लिए हर मुश्किल का सामना करते हैं.
'देवदास' में समर्पण
कुछ रिश्तों में प्यार धीरे-धीरे पूजा जैसा बन जाता है. 'देवदास' में प्रेम का यही गहरा रूप दिखाई देता है. साथ रहना संभव न होने के बावजूद प्रेम अपनी जगह कायम रहता है.
'हीरामंडी' में हद से आगे का प्यार
जब प्यार इंसान की सोच और फैसलों पर हावी हो जाए, तो वह जुनून बन जाता है. 'हीरामंडी' की लज्जो का किरदार इसी भाव को सामने लाता है, जहां मोहब्बत उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा हिस्सा बन जाती है.
'राम-लीला' में आखिरी समर्पण
भंसाली की प्रेम कहानियों का आखिरी पड़ाव अक्सर त्याग होता है. 'राम-लीला' में राम और लीला का प्यार उन्हें ऐसी कुर्बानी तक ले जाता है, जहां जिंदगी से ज्यादा मायने अपने प्रेम के साथ का हो जाता है.
'लव एंड वॉर' से दर्शकों को उम्मीद
यही वजह है कि भंसाली की फिल्मों में प्यार सिर्फ रोमांस नहीं होता. उनकी कहानियां दिखाती हैं कि मोहब्बत इंसान को बदल सकती है. अब उनकी आने वाली फिल्म 'लव एंड वॉर' से भी दर्शकों को इसी तरह की गहरी भावनाओं और रिश्तों की एक नई कहानी की उम्मीद है.
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