Toronto Film Festival: बागी से सांसद बनी फूलन देवी के जीवन पर आधारित फिल्म ‘फूलन’ की टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में खूब सराहन हुई. फिल्ममेकर रिची मेहता के निर्देशन में बनी इस फिल्म का समारोह में प्रीमियर रखा गया. दर्शकों ये फिल्म बेहद पसंद आई और वहां मौजूद दर्शकों ने फिल्म को स्टैंडिंग ओवेशन दिया.
फिल्म फेस्टिवल में ‘फूलन’ को मिला स्टैंडिंग ओवेशन
फिल्म ‘फूलन’ का वर्ल्ड प्रीमियर 16 सितंबर 2026 को 51वें टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF 2026) में हुआ. इस फिल्म को फेस्टिवल के ‘स्पेशल प्रेजेंटेशन’ सेक्शन के तहत मशहूर ‘प्रिंसेस ऑफ वेल्स थिएटर’ में दिखाया गया. इस फिल्म में स्नेहा कुमारी ने फूलन देवी का किरदार निभाया है. इसमें अनुराग ठाकुर, विक्रम प्रताप सिंह, आकाश दहिया, प्रतीक पचौरी और देव दत्त बुढोलिया जैसे कलाकार शामिल हैं.

‘फूलन’ फिल्म की कहानी फूलन देवी की आत्मकथा, ‘आई, फूलन देवी- द ऑटोबायोग्राफी ऑफ इंडियाज बैंडिट क्वीन’ पर आधारित है. ये फिल्म उनके जीवन के एक अहम 48 घंटों पर केंद्रित है, जब उन्हें लगभग 2,000 हथियारबंद लोगों के एक समूह ने घेर लिया था.
फिल्म को लेकर क्या बोले रिची मेहता
फिल्म फेस्टिवल में इसके वर्ल्ड प्रीमियर के बारे में बात करते हुए, राइटर-डायरेक्टर और प्रोड्यूसर रिची मेहता ने कहा, ‘फूलन देवी की कहानी एक ऐसी कहानी है जिसे बिना कोई कंप्रोमाइज किए बताया जाना चाहिए. मैं फूलन देवी की जिंदगी की एक बेहद खास हिस्से की तरफ खींचा चला गया, उसे समय जब दुनिया उनका नाम नहीं जानती थी तब उन्हें गलत नजरिए में रखकर एक मिसअंडरस्टूड लीजेंड के रूप में देखा गया था. ऐसे में मुझे लगा की पुरानी बातों को हटाकर असल में जो इंसान है उसकी कहानी को सामने लेकर आना चाहिए. उनकी कहानी के केंद्र में मुश्किलों का सामना करने, सम्मान की खोज, और अपनी खुद की आवाज उठाने का साहस करना जैसे थीम है जो की आज भी टाइमलेस हैं. ये बातें आज भी उतनी ही मजबूती से लोगों से जुड़ती हैं, जितनी उस वक्त जुड़ती थीं, फिर चाहे संस्कृति या जगह कोई भी हो. इसलिए मुझे लगा कि यह सही वक्त है कि उनकी कहानी को पर्दे पर लाया जाए.’
फूलन देवी की कहानी के साथ पूरा न्याय
आगे रिची मेहता ने कहा, ‘पोचर’ से लेकर ‘फूलन’ तक, अमेजन MGM स्टूडियोज मेरे लिए एक सच्चा क्रिएटिव पार्टनर रहा है, जो एक फिल्ममेकर की सोच पर भरोसा करता है और ऐसी कहानियों को वह ग्लोबल प्लेटफॉर्म देता है, जिसकी वे हकदार हैं. TIFF में दर्शकों को अपनी सीटों से खड़े होकर, इस कहानी से भावुक होते देखना मेरे लिए ये बताने के लिए काफी है कि फूलन की कहानी ठीक उसी तरह लोगों तक पहुंची है, जैसी हम चाहते थे. मुझे उम्मीद है कि मैंने उनकी आवाज और उनकी कहानी के साथ पूरा न्याय किया है, ठीक वैसे ही जैसे वह चाहती थीं कि दुनिया उन्हें जाने.’