Sunday, 25 October, 2026

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‘ये बेइज्जती है…’ Jana Nayagan के विवाद पर भड़के राम गोपाल वर्मा, सेंसर बोर्ड को कहा Outdated

Ram Gopal Varma on Jana Nayagan: बॉलीवुड फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने फिल्म 'जन नायकन' और CBFC के विवाद को लेकर सेंसर बोर्ड पर अपना गुस्सा उतारा है. उन्होंने सेंसर बोर्ड को आउडेटेड बताया है.

Ram Gopal Varma on Jana Nayagan
Ram Gopal Varma on Jana Nayagan

Ram Gopal Varma on Jana Nayagan: तमिल सुपरस्टार विजय थलापति इन दिनों अपनी आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ की रिलीज को लेकर सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के साथ चल रहे विवाद की वजह से सुर्खियों में हैं. बीते दिन ही मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए CBFC को फिल्म ‘जन नायकन’ को U/A सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया है. वहीं, अब इस मामले में बॉलीवुड फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा की एंट्री हो गई है. इस मामले के बीच राम गोपाल वर्मा ने सेंसर बोर्ड पर अपना गुस्सा उतारा है. चलिए आपको बताते हैं कि राम गोपाल वर्मा ने इस पूरे मामले पर क्या कुछ कहा है?

ये ऑडियंस की बेइज्जती…

फिल्म ‘जन नायकन’ और CBFC के बीच चल रही लड़ाई के बीच राम गोपाल वर्मा ने एक बार फिर पूरी बेबाकी से इस मामले पर अपनी राय रखी. राम गोपाल वर्मा ने इस लड़ाई को लेकर अपने विचार व्यक्त करते हुए सेंसर बोर्ड को पुराना और आउटडेटेड बताया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में लोग जो चाहें वो देख सकते हैं. इसमें सेंसरशिप ऑडियंस की बेइज्जती करता है.

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आउडेटेड हो चुका है सेंसर बोर्ड

राम गोपाल वर्मा ने अपने X हैंडल पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट शेयर किया. जिसमें उन्होंने लिखा, ‘CBFC का उद्देश्य तो बहुत पहले ही खत्म हो चुका है, लेकिन इसकी रेलीवेंसी को लेकर होने वाली बहस में सुस्ती के कारण इसे अब तक जिंदा रखा जा रहा है. इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार फिल्म इंडस्ट्री ही है. ये मानना बेवकूफी है कि आज भी सेंसर बोर्ड जरूरी है.’ उन्होंने आगे लिखा, ‘सेंसर बोर्ड पुराना और आउटडेटेड हो चुका है.

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सेंसरशिप दिखावा कर रही है…

रामगोपाल वर्मा ने आगे लिखा, ‘किसी फिल्म से एक शब्द हटाना और किसी सीन को काटना, छोटा करना या सिगरेट को ब्लर करने से समाज की रक्षा हो जाएगी, ये सोचना ही एक बड़ा मजाक है. सेंसर बोर्ड तब बना था जब फिल्में और तस्वीरें बहुत कम होती थीं और लोगों तक उनकी पहुंच लिमिटेड थी. इसके साथ ही मीडिया पर सरकार का पूरा कंट्रोल था. वहीं, आज के डिजिटल समय में 12 साल का बच्चा अपने फोन से आतंकवादी हमले का वीडियो देख सकता है, वहीं 9 साल का बच्चा अश्लील चीजें देख सकता है. इस दौर में सेंसरशिप ऑडियंस को सच्चाई से रूबरू होने से रोक रही है. आज जो सेंसर बोर्ड कर रही है वो सुरक्षा नहीं बल्कि एक दिखावा है.’

First published on: Jan 10, 2026 09:38 AM

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