Monday, 28 September, 2026

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Lata Mangeshkar Birth Anniversary: 5 साल की उम्र में रंगमंच, 13 में पिता को खोया… ऐसे ‘हेमा’ से बनीं स्वर कोकिला लता मंगेशकर

Lata Mangeshkar: भारतीय संगीत की दुनिया में लता मंगेशकर का नाम हमेशा अमर रहेगा. 28 सितंबर को उनकी बर्थ एनिवर्सरी है, ऐसे में आइए उनके जीवन से जुड़ी इन दिलचस्प बातों को जानते हैं.

lata mangeshkar
कैसे लता मंगेशकर बनीं स्वर कोकिला?

Lata Mangeshkar Birth Anniversary: लता मंगेशकर का नाम भारतीय संगीत की दुनिया में हमेशा अमर रहेगा. 28 सितंबर को जन्मीं स्वर कोकिला अगर आज हमारे बीच होतीं तो अपना 97वां जन्मदिन मना रही होतीं. 6 फरवरी 2022 को 92 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था, लेकिन उनकी आवाज आज भी करोड़ों दिलों में जिंदा है. खास बात यह है कि जिस लता को दुनिया महान गायिका के तौर पर जानती है, उनका शुरुआती रुझान अभिनय की तरफ था.

5 साल की उम्र में किया था अभिनय

लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में हुआ था. उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर रंगमंच के कलाकार और गायक थे, इसलिए संगीत और अभिनय दोनों उन्हें परिवार से विरासत के तौर पर मिला था. जन्म के समय उनका नाम ‘हेमा’ रखा गया था, लेकिन बाद में पिता ने थिएटर के एक किरदार ‘लतिका’ के नाम पर उनका नाम लता रख दिया. महज पांच साल की उम्र में उन्होंने पहली बार मंच पर अभिनय किया था.

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13 साल में सिर से उठा पिता का साया

लता की जिंदगी ने कम उम्र में ही बड़ा दर्दभरा मोड़ लिया जब वह सिर्फ 13 साल की थीं, उनके पिता का निधन हो गया. परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. उन्होंने फिल्मों में छोटे किरदार भी निभाए और इसी दौरान संगीत की शिक्षा जारी रखी. महज 13 साल की उम्र में उन्होंने मराठी फिल्म ‘पहिली मंगलागौर’ से अभिनय की शुरुआत की थी.

पहली कमाई थी 25 रुपये

इसके बाद उनकी आवाज ने धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया में जगह बनानी शुरू की. 1942 में उन्होंने मराठी फिल्म ‘किती हसाल’ के लिए गाना गाया और उनकी पहली कमाई 25 रुपये बताई जाती है. आगे चलकर फिल्म ‘महल’ के गीत ‘आएगा आने वाला’ ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई.

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एक दिन ही गईं स्कूल

लता मंगेशकर की पढ़ाई से जुड़ा किस्सा भी बेहद दिलचस्प है. कहा जाता है कि वह सिर्फ एक दिन स्कूल गई थीं. अपनी छोटी बहन आशा भोसले को साथ ले जाने पर स्कूल में फीस को लेकर बात हुई और इसके बाद लता ने स्कूल छोड़ दिया, लेकिन किस्मत में कुछ और ही लिखा था, आगे चलकर लता जी को कई विश्वविद्यालयों से मानद उपाधियां मिलीं.

रफी से भी हुई थी अनबन

लता और मोहम्मद रफी की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार गाने दिए. हालांकि, एक दौर में दोनों के बीच ऐसी अनबन हुई कि उन्होंने साथ गाना तक बंद कर दिया था. करीब चार साल बाद नरगिस के प्रयासों से दोनों ने फिर साथ मंच शेयर किया.

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50 हजार से ज्यादा गाए गानें

लता मंगेशकर ने अपने लंबे करियर में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी. 1974 में वह लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल में प्रस्तुति देने वाली पहली भारतीय गायिका बनीं. उनकी आवाज को लेकर उनका मानना था कि यह ईश्वर और माता-पिता का आशीर्वाद है. बता दें, लता मंगेशकर जी ने दुनियाभर की 36 भाषाओं में 50 हजार से ज्यादा गानें गाए थे.

संगीत प्रेमियों के दिल में हमेशा रहेंगी जिंदा

लता दीदी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन ‘लग जा गले’, ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’, ‘कहीं दीप जले कहीं दिल’ और ऐसे अनगिनत गीतों के जरिए वह हमेशा संगीत प्रेमियों के बीच मौजूद रहेंगी.

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First published on: Sep 28, 2026 01:13 PM

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