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Netflix की इन 5 फिल्मों का सस्पेंस सुलझाना नहीं है आसान, क्लाइमेक्स देखकर घूम जाएगा दिमाग
अगर आप उन ऑडियंस में से हैं, जिन्हें ऐसी फिल्में पसंद हैं जो आखिरी सीन तक आपको अंदाजा लगाने पर मजबूर कर दें, तो नेटफ्लिक्स का यह कलेक्शन आपके लिए ही है. इन फिल्मों की कहानी में रहस्य की इतनी परतें हैं कि एक सुलझती है तो दूसरी उलझ जाती है. प्यार, धोखा, कत्ल और दिमाग चकरा देने वाले क्लाइमेक्स से सजी ये फिल्में न सिर्फ आपको डराएंगी बल्कि आपकी सोच को भी चुनौती देंगी. क्या आप तैयार हैं उस कातिल को ढूंढने के लिए जो आपकी नजरों के सामने होकर भी छिपा हुआ है?
हसीन दिलरुबा (Haseen Dillruba)
तापसी पन्नू और विक्रांत मेस्सी की यह फिल्म प्यार और पागलपन की एक अनोखी मर्डर मिस्ट्री है. कहानी एक ऐसी पत्नी के इर्द-गिर्द घूमती है जिस पर अपने ही पति की हत्या का आरोप है. फिल्म का प्लॉट मशहूर लेखक दिनेश पंडित के उपन्यासों से प्रेरित है और इसका क्लाइमेक्स इतना चौंकाने वाला है कि आप अंत तक कातिल का अंदाजा नहीं लगा पाएंगे.
मर्डर मुबारक (Murder Mubarak)
अगर आपको यह सुलझाना पसंद है कि 'कातिल कौन है', तो यह फिल्म आपके लिए बेस्ट है. दिल्ली के एक रईस क्लब में हुए मर्डर की जांच करने जब पंकज त्रिपाठी पहुंचते हैं, तो क्लब का हर सदस्य शक के घेरे में होता है. सारा अली खान और विजय वर्मा जैसे सितारों से सजी इस फिल्म में सस्पेंस की कई परतें हैं जो आखिरी सीन में जाकर खुलती हैं.
जाने जां (Jaane Jaan)
करीना कपूर खान की यह फिल्म एक जापानी उपन्यास पर आधारित है. फिल्म में एक घरेलू हिंसा के बाद हुए कत्ल को छिपाने के लिए एक जीनियस गणित के टीचर (जयदीप अहलावत) का दिमाग पुलिस को बुरी तरह उलझा देता है. जासूसी और माइंड गेम्स पसंद करने वालों के लिए यह एक लाजवाब फिल्म है जिसका क्लाइमेक्स दिल जीत लेता है.
दो पत्ती (Do Patti)
इस फिल्म में कृति सेनन ने जुड़वां बहनों का डबल रोल निभाया है जो एक-दूसरे से नफरत करती हैं. काजोल एक पुलिस ऑफिसर के रूप में इन दोनों बहनों के बीच बुने गए झूठ और घरेलू हिंसा के रहस्य को सुलझाती नजर आती हैं. फिल्म का अंत काफी इमोशनल और सस्पेंस से भरा हुआ है जो समाज को एक बड़ा संदेश भी देता है.
सेक्टर 36 (Sector 36)
सच्ची घटनाओं से प्रेरित यह फिल्म आपको अंदर तक हिला कर रख देगी. विक्रांत मेस्सी ने इसमें एक खूंखार साइको किलर का ऐसा किरदार निभाया है जिसे देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. दीपक डोबरियाल एक ईमानदार पुलिस वाले के रोल में लापता बच्चों की तलाश करते हैं. यह फिल्म जासूसी के साथ-साथ समाज की एक बेहद डार्क और काली सच्चाई को पेश करती है.