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खुद को मनहूस मानता था ये एक्टर, सड़क पर छुपकर घंटों बहाए आंसू; सालों बाद बयां किया दर्द
बॉलीवुड में तमाम ऐसे एक्टर और एक्ट्रेस हैं, जिन्होंने सालों तक एक बेहतर मुकाम तक पहुंचने के लिए मेहनत की है. इंडस्ट्री में कई ऐसे एक्टर्स हैं, जो कि लंबे वक्त तक सपोर्टिंग रोल्स में नजर आए और लीड रोल एक्टर बनने तक उन्हें खूब पापड़ बेलने पड़े थे. वहीं, आज हम एक ऐसे ही एक्टर के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने करियर को बनाने में कड़ी मेहनत की है. इतना ही नहीं एक वक्त पर वह खुद को मनहूस मानने लगे थे.
नवाजुद्दीन सिद्दीकी
दरअसल, हम बात कर रहे हैं नवाजुद्दीन सिद्दीकी की. जो कि फिल्म इंडस्ट्री के बेहतरीन कलाकारों में से एक हैं. वह अपनी शानदार एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने गैंग्स ऑफ वासेपुर, बजरंगी भाईजान, रात अकेली है, हड्डी, ठाकरे, मांटो, रईस, रमन राघव जैसी तमाम फिल्मों में काम किया है. हालांकि इन बेहतरीन फिल्मों में लीड रोल या एक ऐसा अहम रोल निभाना उनके लिए आसान नहीं था. उन्होंने फिल्मों में जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत की थी.
नवाजुद्दीन सिद्दीकी स्ट्रगल
नवाजुद्दीन सिद्दीकी खुद बताते हैं कि वह मुंबई सिर्फ 2500 रुपये लेकर आए थे और इस बीच उन्होंने चौकीदार की भी नौकरी की. दशकों तक वह बेहतर रोल के लिए भटकते रहे और खुद को मनहूस मानते रहे.
नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने शेयर की अपने स्ट्रगल के दिनों की कहानी
नवाजुद्दीन ने अपने स्ट्रगल के बारे में बात करते हुए एबीपी न्यूज से साझा किया और कहा, " जब मैं शुरू में इंडस्ट्री में आया था तो बहुत ही कॉन्फिडेंस के साथ आया था. खुद को मानकर आया था कि मैं एक्टर हूं, थिएटर से जो आता है वो ऐसा सोचकर ही आता है. लेकिन स्ट्रगल के थपेड़े खा-खाकर थोड़े से आत्मविश्वास की भी कमी हो जाती है. कई बार अपने पर शक होने लगता है कि जो सीखा वो गलत सीखा कि हमें काम नहीं मिल रहा है.
नवाजुद्दीन सिद्दीकी खुद को मानते थे मनहूस
नवाजुद्दीनी ने आगे कहा, " मैंने वो मेंटल स्थिति देखी, जब खुद पर भी शक हुआ. एक शब्द होता है कि ना पनौती कि काम मिलते मिलते हाथ से चला जाता था. कई बार लगता था कि मैं ही मनहूस हूं. मुझे तो 10 साल तक ऐसा लगता रहा कि मैं मनहूस हूं. क्योंकि जैसे ही कोई बड़ा काम आता था तो वो हाथ से छूट जाता था. मैं सबको बता देता था, लेकिन जब काम करने के दिन करीब आते थे तो मुझे काम से निकाल दिया जाता था और पता भी नहीं होता था.
नवाजुद्दीन सड़क पर छुपकर रोते थे
एक्टर ने आगे ये भी बताया कि वह परेशान होकर सड़क पर बैठकर रोते थे. उन्होंने कहा, " इन सब चीजों से इतना हताश और परेशान हो जाते थे कि कभी-कभी सड़क पर रोने का मन करता था. कई बार तो रो देते थे. लेकिन वो भी छुपकर रोते थे कि कोई देख ना ले. मैं पार्ले जी बिस्कुट खाकर ही गुजारा करता था. आज भी जब मैं पार्ले जी खाता हूं तो मुझे दिल्ली की याद आती है. नाश्ता, दोपहर का खाना, रात का खाना सब में पार्ले जी ही खाता था. आज जब भी मैं ये खाता हूं तो ऐसा लगता है कि जैसे मेरे पास कुछ भी खाने के लिए नहीं है. इसका स्वाद आज बिल्कुल तकलीफ देता है.
नवाजुद्दीन सिद्दीकी की अपकमिंग फिल्में
काम को लेकर बात करें तो एक्टर जल्द ही सोहम शाह स्टारर फिल्म तुम्बाड 2 में नजर आएंगे. इस फिल्म में उनके साथ आलिया भट्ट भी होंगी. फिल्म सिनेमाघरों में 3 दिसंबर 2027 को रिलीज होगी. इसके अलावा वह 'मैं एक्टर नहीं हूं' में भी दिखाई देंगे, जो कि 8 मई को रिलीज होने वाली है.