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ऐन मौके पर क्यों बदलना पड़ा ‘शोले’ का क्लाइमैक्स? सालों बाद सामने आई असली कहानी
Sholay Original Climax: हिंदी सिनेमा की सबसे आइकॉनिक फिल्मों में शामिल 'शोले' आज भी दर्शकों के दिलों पर राज करती है. जय-वीरू की दोस्ती, गब्बर सिंह का खौफ और ठाकुर का बदला. फिल्म का हर किरदार और हर सीन यादगार बन चुका है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दर्शकों ने जिस क्लाइमैक्स को बड़े पर्दे पर देखा, वो फिल्म की असली एंडिंग नहीं थी?
ऐसे हुआ इतने बड़े राज का खुलासा?
इस बात का खुलासा खुद फिल्म के निर्देशक रमेश सिप्पी ने एक इंटरव्यू में किया था. उन्होंने बताया था कि 'शोले' का ओरिजिनल क्लाइमैक्स पूरी तरह अलग था, लेकिन सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के कारण उसे बदलना पड़ा.
क्या थी असली एंडिंग?
रमेश सिप्पी के मुताबिक, फिल्म के मूल क्लाइमैक्स में ठाकुर बलदेव सिंह अपने पैरों की मदद से गब्बर सिंह को मार डालता है. यह सीन ठाकुर के बदले को पूरी तरह अंजाम तक पहुंचाता था. हालांकि, सेंसर बोर्ड को यह अंत काफी हिंसक लगा और उन्होंने इसे मंजूरी देने से इनकार कर दिया.
क्या थी गब्बर को मारने की कहानी?
निर्देशक ने बताया कि उस समय वह मुश्किल में पड़ गए थे, क्योंकि ठाकुर के हाथ नहीं थे और ऐसे में उसके लिए गब्बर को मारना कहानी का अहम हिस्सा था, लेकिन सेंसर बोर्ड की शर्तों के चलते टीम को क्लाइमैक्स बदलना पड़ा.
आखिर कैसे बदला गया अंत?
उन्होंने आगे बताया कि काफी विचार-विमर्श के बाद फिल्म के अंत को नया रूप दिया गया. बदले हुए क्लाइमैक्स में ठाकुर गब्बर को मारने के बजाय पुलिस के हवाले कर देता है. रमेश सिप्पी इस बदलाव से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे, लेकिन सेंसर बोर्ड के नियमों के कारण उन्हें यह फैसला लेना पड़ा.
'शोले' नहीं, कुछ और था फिल्म का नाम
दिलचस्प बात यह है कि लेखक सलीम खान और जावेद अख्तर शुरुआत में फिल्म का नाम 'अंगारे' रखना चाहते थे. बाद में सलीम खान ने 'शोले' नाम सुझाया, जो पूरी टीम को पसंद आया और यही फिल्म का आधिकारिक नाम बन गया.
ऐसे बने थे गब्बर सिंह
गब्बर सिंह के किरदार के लिए अमजद खान का नाम जावेद अख्तर ने सुझाया था. उन्होंने अमजद खान को एक नाटक में देखा था और उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्हें इस यादगार किरदार के लिए चुना गया था.
बॉक्स ऑफिस पर रचा था इतिहास
करीब 3 करोड़ रुपये के बजट में बनी 'शोले' ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 15 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया था. फिल्म ने 100 से ज्यादा सिनेमाघरों में सिल्वर जुबली मनाकर इतिहास रच दिया था. यही वजह है कि रिलीज के दशकों बाद भी 'शोले' का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोलता है.