Monday, 3 August, 2026

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एक ना ने बदल दी मोहम्मद रफी की किस्मत! ऐसे मिला था पहला प्लेबैक सिंगिंग का ऑफर, दिलचस्प है किस्सा

हिंदी सिनेमा के दिग्गज प्लेबैक सिंगर मोहम्मद रफी की आवाज आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में बसती है. उनके गाए गीत दशकों बाद भी लोगों के जहन में अमर हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रफी को पहली बार गाने का मौका कैसे मिला था? और कैसे उस मौके ने न सिर्फ उनकी किस्मत बदली बल्कि भारतीय संगीत जगत को एक अमर आवाज भी दे दी.

हिंदी सिनेमा के दिग्गज प्लेबैक सिंगर मोहम्मद रफी की आवाज आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में बसती है. उनके गाए गीत दशकों बाद भी लोगों के जहन में अमर हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रफी को पहली बार गाने का मौका कैसे मिला था? और कैसे उस मौके ने न सिर्फ उनकी किस्मत बदली बल्कि भारतीय संगीत जगत को एक अमर आवाज भी दे दी.

हिंदी सिनेमा का सितारा

हिंदी सिनेमा का एक ऐसा सितारा जिसकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ी, वो दिग्गज जिनकी मधुर आवाज को हर पीढ़ी से प्यार मिला, उस महान प्लेबैक सिंगर का नाम मोहम्मद रफी है, उनके गाए गाने दशकों बाद भी उतने ही पसंद किए जाते हैं, जितने उस दौर में थे, पर क्या आप जानते एक साधारण सा लड़का जो अपने फेवरेट संगीतकार का गीत सुनने गया था, और उसी मंच पर उस 13 साल के लड़के की किस्मत बदल गई. रफी साहब को न सिर्फ पहली बार गाने का मौका मिला था, यही से उनके संगीत के सुनहरे सफर की शुरुआत हुई, आइए जानते हैं क्या है वो किस्सा?  

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गाने के शौकीन थे रफी साहब

कहा जाता है कि बचपन से ही मोहम्मद रफी को गाने का शौक था. वह अपने गांव में घूमने वाले एक फकीर के सुरों की नकल किया करते थे. उनकी इसी रुचि ने आगे चलकर उन्हें म्यूजिक की दुनिया में पहचान दिलाई. रफी की जिंदगी का सबसे अहम मोड़ तब आया, जब वह अपने बड़े भाई के साथ लाहौर स्थित ऑल इंडिया रेडियो में मशहूर गायक और अभिनेता के.एल. सहगल का लाइव कार्यक्रम देखने पहुंचे. उस समय सहगल की पॉपुलैरिटी चरम पर थी और उन्हें सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे.  

एक कार्यक्रम से चमकी किस्मत

कार्यक्रम शुरू होने ही वाला था कि अचानक बिजली चली गई. बताया जाता है कि इस वजह से के.एल. सहगल ने मंच पर गाने से इनकार कर दिया. उनके फैसले से वहां मौजूद दर्शक निराश हो गए और माहौल बिगड़ने लगा.    

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एक न और बदल गई जिंदगी

ऐसे में रफी के बड़े भाई ने आयोजकों से कहा कि उनका छोटा भाई भी अच्छा गाता है और उसे मंच पर गाने का मौका दिया जाना चाहिए. महज 13 साल की उम्र में मोहम्मद रफी पहली बार स्टेज पर पहुंचे और अपनी आवाज का ऐसा जादू बिखेरा कि पूरा माहौल बदल गया. दर्शकों ने उनकी गायकी की जमकर तारीफ की.  

कार्यक्रम में मौजूद थे फेमस संगीतकार

इसी कार्यक्रम में फेमस संगीतकार श्याम सुंदर भी मौजूद थे. रफी की आवाज से वह इतने इंप्रेस हुए कि उन्होंने उन्हें अपनी पंजाबी फिल्म 'गुल बलोच' में गाने का मौका दिया. इस फिल्म में मोहम्मद रफी ने 'गोरिये नी, हीरिये नी' नाम का डुएट गीत गाया, जो उनके करियर का पहला फिल्मी गीत माना जाता है.

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मोहम्मद रफी के सुनहरे सफर की हुई शुरुआत

यहीं से मोहम्मद रफी के सुनहरे सफर की शुरुआत हुई. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने करियर में हजारों गीत गाकर भारतीय संगीत को अनमोल धरोहर दी. आज भी उनकी मधुर आवाज नई पीढ़ी के संगीत प्रेमियों के बीच उतनी ही पॉपुलर है, जितनी अपने दौर में थी.

First published on: Aug 03, 2026 05:29 PM

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