Sunday, 9 August, 2026

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न सोशल मीडिया, न इंटरनेट… फिर भी दुनिया तक पहुंची मोहम्मद रफी की आवाज, 26 भाषाओं में गाए गाने

Mohammed Rafi Songs: महान गायक मोहम्मद रफी ने बिना किसी इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में भी ग्लोबल लेवल पर पहचान बनाई. उन्होंने 26 भाषाओं में गीत गाने के साथ-साथ केरोसिन तेल के एक चर्चित विज्ञापन के लिए भी अपनी आवाज दी थी.

Mohammed Rafi Songs: संगीत की दुनिया के सबसे महान और बहुमुखी गायकों में शुमार मोहम्मद रफी की सुरीली आवाज का जादू आज भी करोड़ों लोगों के दिलों पर राज कर रहा है. 1940 के दशक से अपने गायन सफर की शुरुआत करने वाले रफी साहब ने भारतीय संगीत को एक नई ऊंचाई प्रदान की. जिस दौर में न इंटरनेट था और न ही सोशल मीडिया, उस जमाने में भी उनकी आवाज सीमाओं को लांघकर पूरी दुनिया में गूंजती थी. उन्होंने न सिर्फ दर्जनों भारतीय और विदेशी भाषाओं में गीत गाए, बल्कि केरोसिन तेल के विज्ञापन के लिए भी अपनी जादुई आवाज दी थी.

26 भाषाओं में गाए कालजयी गीत

रफी साहब की बहुमुखी गायकी सिर्फ हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं थी. उन्होंने अपने पूरे करियर में कुल 26 भाषाओं में गाने गाए. इनमें हिंदी, पंजाबी, बंगाली, मराठी, तमिल, तेलुगु जैसी भारतीय बोलियों के साथ-साथ अंग्रेजी (English), फारसी (Persian), स्पेनिश (Spanish) और डच (Dutch) जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषाएं भी शामिल थीं.

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विदेशी भाषाओं में हिंदी धुनों का प्रयोग

खास बात यह थी कि उनके कुछ अंग्रेजी गाने उनकी ही सुपरहिट हिंदी फिल्मों की धुनों पर बने थे. फिल्म ‘गुमनाम’ के लोकप्रिय गीत ‘हम काले हैं तो क्या हुआ’ की धुन पर उन्होंने ‘द शी आई लव इज’ गाया था. वहीं ‘सूरज’ फिल्म के ‘बहारों फूल बरसाओ’ की धुन पर उन्होंने अंग्रेजी गाना रिकॉर्ड किया था.

बिना इंटरनेट के इंटरनेशन लेवल पर पहचान

आज के आधुनिक दौर में किसी गायक का विदेश में फेमस होना आसान है, लेकिन उस समय न गूगल था और न ही कोई डिजिटल माध्यम. इसके बावजूद एक भारतीय गायक की आवाज का महाद्वीपों के पार पहुंचना और अलग-अलग संस्कृतियों में अपनाया जाना उनकी अद्भुत प्रतिभा और लोकप्रियता का प्रमाण है.

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केरोसिन तेल का पॉपुलर विज्ञापन जिंगल

फिल्मों के अलावा रफी साहब ने कुछ विज्ञापनों में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा था. 1950 के दशक में उन्होंने ‘बर्मा शेल ऑयल कंपनी’ (Burmah Shell Oil Company) के केरोसिन तेल के लिए एक जिंगल गाया था. मुकुल रॉय के संगीतबद्ध किए गए इस जिंगल की पंक्तियां रेडियो पर खूब प्रसारित होती थीं.

संगीत जगत की अनमोल और अमर विरासत

मोहम्मद रफी ने अपनी सुरीली आवाज से भाषाओं और संस्कृतियों के बीच एक अटूट सेतु का निर्माण किया. उनके गाए भजन, कव्वाली, रोमांटिक और दर्दभरे नगमे आज भी उतने ही तरोताजा महसूस होते हैं. यही वजह है कि समय बीतने के साथ उनकी संगीतमय विरासत और भी अमर होती जा रही है.

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First published on: Aug 08, 2026 10:01 AM

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