बॉलीवुड के मशहूर एक्टर मुश्ताक खान के निधन से इंडस्ट्री में शोक की लहर है. कैंसर से जंग लड़ने के बाद 24 सितंबर को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था. 30 सितंबर को उनके लिए प्रार्थना सभा रखी गई थी. जिसमें फिल्म इंडस्ट्री के कई सितारे उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे, इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ, जिसने हर किसी के होश उड़ा दिए, दावा किया किया गया कि अभिनेता राजपाल यादव को प्रार्थना सभा से बाहर निकाल दिया गया और उनकी बेइज्जती हुई. अब इस वायरल दावे की असल कहानी सामने आ गई है.
क्या राजपाल यादव को सच में निकाला गया?
वायरल वीडियो को लेकर कंटेंट क्रिएटर नाजमा शेख ने सफाई दी है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि वीडियो को गलत तरीके से पेश किया जा रहा. उनके मुताबिक, राजपाल यादव और मुश्ताक खान के बीच बेहद करीबी रिश्ता था. राजपाल यादव उन्हें बड़े भाई की तरह मानते थे.
‘मुश्ताक खान को भाई मानते थे राजपाल’
नाजमा ने बताया कि मुश्ताक खान के निधन से कुछ घंटे पहले तक राजपाल यादव उनके साथ थे. इसके बाद जब उन्हें कब्रिस्तान ले जाया गया, तब भी राजपाल वहां मौजूद थे. प्रार्थना सभा के दौरान भी राजपाल यादव वहां पहुंचे थे. ऐसे में उन्हें सभा से भगाए जाने की बात कहा से सही है?
फोटो खींचने वालों पर आया था गुस्सा
नाजमा शेख के मुताबिक, असल में उनका गुस्सा राजपाल यादव पर नहीं, बल्कि उन लोगों पर था जो प्रार्थना सभा के माहौल को समझे बिना वहां लगातार तस्वीरें और सेल्फी ले रहे थे. उन्होंने कहा कि यह किसी तरह का फोटो सेशन या सेल्फी पॉइंट नहीं था, बल्कि मुश्ताक खान के लिए दुआ और उन्हें श्रद्धांजलि देने की जगह थी.
आखिर किस बात पर थी नाराजगी?
उन्होंने बताया कि मुकेश ऋषि, उपासना सिंह और राजपाल यादव जैसे कलाकारों के साथ लोग लगातार तस्वीरें खींच रहे थे. इसी बात पर उन्होंने नाराजगी जताई थी.
नाजमा की खास अपील
नाजमा ने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि वायरल वीडियो को अधूरी जानकारी के साथ पेश न किया जाए. उन्होंने साफ किया कि उनकी नाराजगी राजपाल यादव से नहीं थी. उन्होंने लोगों से प्रार्थना सभा की गरिमा बनाए रखने की अपील की थी.
तो यह थी असली कहानी?
यानी जिस वीडियो को देखकर राजपाल यादव की बेइज्जती और उन्हें सभा से निकाले जाने की बातें कही जा रही थीं, उसके पीछे की कहानी कुछ और ही है. सामने आई सफाई के मुताबिक, मामला राजपाल यादव को बाहर निकालने का नहीं, बल्कि प्रार्थना सभा में फोटो खींचने वाले लोगों को लेकर नाराजगी का था.