Dadi Ki Shaadi Review: कपिल शर्मा की फिल्म ‘दादी की शादी’ आज रिलीज हो चुकी है, और इस रिव्यू में आपको बताने वाली हूं, कि इस वीकेंड आपको ये फिल्म देखनी चाहिए या नहीं. तो देखिए, अगर वन वर्ड में कहूं, तो इस फिल्म को बनाने के पीछे मेकर्स का इंटेंट बिल्कुल साफ था. मेकर्स इसे एक लाइट हार्टेड फैमिली कॉमेडी फिल्म बनाना चाहते थे. कॉन्सेप्ट अच्छा है और फर्स्ट हाफ में फिल्म ज्यादा अच्छी लगती है, लेकिन सेकंड हाफ थोड़ा कमजोर पड़ जाता है.
कैसी है फिल्म की स्टार कास्ट?
फिल्म की कास्टिंग अच्छी है. इस फिल्म से रिद्धिमा कपूर साहनी का डेब्यू हुआ है, और यकीन मानिए वो स्क्रीन पर बहुत अच्छी लगी हैं. उन्होंने एक्टिंग भी अच्छी की है. फिल्म में कपिल शर्मा का काम भी बढ़िया है. इसके अलावा नीतू कपूर और आर. सरथकुमार ने कमाल कर दिया है. सादिया खतीब, योगराज सिंह, तेजस्विनी कोल्हापुरे और दीपक दत्ता ने भी अच्छा काम किया है. आर. सरथकुमार साउथ के जाने-माने एक्टर हैं, जिन्होंने 71 साल की उम्र में बॉलीवुड में डेब्यू किया है, और क्या कमाल का काम किया है.
फिल्म की कहानी
अब बात कर लेते हैं फिल्म की कहानी की फिल्म की कहानी बहुत सिंपल है. नीतू कपूर शिमला में रहती हैं. उनके तीन बच्चे हैं जो दिल्ली, चंडीगढ़ और सिंगापुर में रहते हैं. बेटी का किरदार रिद्धिमा कपूर साहनी ने निभाया है. इन सबको एक दिन खबर मिलती है, कि उनकी मां नीतू कपूर शादी करने जा रही हैं, और दूल्हे हैं आर. सरथकुमार. उधर कपिल शर्मा, सादिया खतीब के मंगेतर हैं, लेकिन दादी की शादी के चलते उनकी शादी पर भी तलवार लटक गई है. फिल्म की आगे की कहानी भी यही है, कि क्या दादी की शादी हो पाएगी या नहीं.
फिल्म की खास बातें
फिल्म का फर्स्ट हाफ मजेदार है. फिल्म आपको कई पार्ट्स में खूब हंसाएगी और एक अच्छा मैसेज भी देती है. देखिए, फिल्म बहुत लाइट फैमिली एंटरटेन मूवी है, जो कई जरूरी मुद्दे उठाती है, जिन पर आज के जमाने में बात की जानी चाहिए. क्या हम करियर और पैसे के चलते कई जरूरी रिश्तों से दूर होते जा रहे हैं? क्या वर्चुअल रियलिटी ने हमें असली रिएलिटी से दूर कर दिया है? फिल्म इन मुद्दों को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाने की कोशिश करती है.
फिल्म का कमजोर पक्ष
फिल्म का म्यूजिक ज्यादा खास नहीं है. हां, सोनू निगम का गाना काफी वक्त बाद सुनना अच्छा लगता है, लेकिन बाकी गाने थोड़े अननेसेसरी लगते हैं. फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है, इसकी एडिटिंग। खासतौर पर सेकंड हाफ पूरी तरह ड्रैग लगता है. अगर उसकी एडिटिंग बेहतर की जाती, तो फिल्म और शानदार हो सकती थी.
फाइनल वर्डिक्ट
अगर आप एक हल्की-फुल्की फैमिली एंटरटेनर फिल्म देखना चाहते हैं, जिसमें कॉमेडी, इमोशन और फैमिली ड्रामा हो, तो ये फिल्म एक बार देखी जा सकती है.