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इस पाकिस्तानी पहलवान के कारण ‘दारा सिंह’ बने थे एक्टर, सिर्फ एक रोल ने बनाया दर्शकों के बीच भगवान
दारा सिंह बॉलीवुड के जाने माने एक्टर हुआ करते थे. उन्होंने इंडस्ट्री में तमाम फिल्मों में काम किया है और अपनी एक अलग पहचान हासिल की है. हालांकि उन्हें एक्टर बनाने के पीछे एक जाने माने पाकिस्तानी पहलवान का हाथ था. इतना ही नहीं जब वो एक्टर बने तो उन्हें एक रोल के कारण लोगों ने भगवान मानना शुरू कर दिया और वह पूरे भारतवर्ष में फेमस हो गए.तो चलिए एक नजर जानते हैं दारा सिंह से जुड़े उस किस्से के बारे में कि वह एक्टर कैसे बने.
दारा सिंह ने पाकिस्तान पहलवान गामा के कारण लिया एक्टिंग का फैसला
दारा सिंह एक्टिंग से पहले पहलवानी किया करते और फिल्मों से उनका दूर-दूर तक कोई भी नाता नहीं था. इतना ही नहीं वह पहलवानी के पीछे दीवाने थे और वह इसे कभी भी नहीं छोड़ना चाहते थे. हालांकि इस पहलवानी ने उन्हें लोगों के बीच काफी पॉपुलर बनाया और इसी के कारण तमाम फिल्ममेकर्स ने उन्हें फिल्मों के लिए भी ऑफर किया. लेकिन वह लगातार मना करते रहे. हालांकि पाकिस्तान के महान पहलवान गामा से मिलने के बाद उन्होंने एक्टिंग में कदम रखने का फैसला लिया.
गामा थे पाकिस्तान के बड़े पहलवान
दरअसल, गामा पहलवान पाकिस्तान के बहुत बड़े पहलवान थे. जब वह जवान थे, तो दुनिया भर में उनका नाम था और कुश्ती के लिए वह काफी मशहूर थे. हालांकि जिंदगी के आखिरी के दिनों में उनका बुरा हाल हो गया था. इतना ही वह अपने चेहरे पर बैठी हुई एक मक्खी तक नहीं हटा पाते थे. लेकिन जब दारा सिंह को गामा के हालातों का पता चला तो वह उनसे मिलने के लिए पहुंचे, जहां वह उनकी हालत को देखकर हैरान रह गए थे.
विंदू दारा सिंह ने सुनाया पिता दारा सिंह का किस्सा
हाल ही में विंदू दारा सिंह ने अपने पिता दारा सिंह को लेकर एक किस्सा सुनाया और बताया कि कैसे उन्होंने एक्टिंग करने का फैसला किया. उन्होंने कहा, " डैडी के पास फिल्मों के बड़े ऑफर आते थे, लेकिन वो ऑफर कभी स्वीकार नहीं करते थे. वो सिर्फ रेसलिंग करना चाहते थे. लेकिन जब वो गामा के पास पहुंचे, तो देखा कि गामा अपनी नाक पर बैठी मक्खी भी नहीं उड़ा पा रहे हैं.
गामा ने शेयर किया अपना एक्सपीरियंस
विंदू ने आगे बताया, " गामा पहलवान ने फिर सिर ऊपर किया और डैडी को देखा. वो बहुत खुश हुए और उन्होंने कहा, " आजा दारा आ जा. गामा का हाल देख ले. वर्ल्ड का सबसे स्ट्रांग आदमी ऐसे पड़ा है. वो फिर दारा को अपने एक्सपीरियंस से बोले, ' मेरी एक बात याद रखना, जब तक जवानी है, तब तक पहलवानी है और उसके बाद कुछ नहीं."
गामा की हालत देख दारा सिंह ने लिया एक्टिंग का फैसला
विंदू ने बताया कि गामा पहलवान ने डैडी को आगे, " जिंदगी अपनी मेरी जैसी मत करना. जिसके बाद गामा का हाल देखकर दारा सिंह सोच में पड़ गए कि मैं आज सिर्फ कुश्ती लड़ रहा हूं, कहीं आगे मेरा भी गामा जैसा हाल ना हो जाए. इसके बाद वो गामा से मिलकर निकल गए और जाते हुए उनके तकिए के नीचे पैसे रख दिए. विंदू ने बताया कि गामा की हालत देख कर उनके पिता ने सीख ली और उसके बाद वो बॉम्बे आ गए और कई फिल्में भी साइन की. इतना ही नहीं उन्होंने अपने साथ-साथ अन्य पहलवानों को भी फिल्मों में काम दिलाया.
दारा सिंह एक्टिंग करियर
इसके बाद विंदू ने 1952 की फिल्म संगदिल से एक्टिंग करियर की शुरुआत की. उसके बाद वह 1962 में फिल्म किंग कॉन्ग में लीड रोल में नजर आए. उन्होंने अपने करियर में 100 से ज्यादा हिंदी और पंजाबी मूवीज में काम किया. हालांकि उन्हें सबसे ज्यादा पॉपुलैरिटी टीवी शो रामायण से मिली, जिसमें वह भगवान हनुमान के रोल में नजर आए थे. इस रोल ने उन्हें लोगों के बीच भगवान का दर्जा दिला दिया. 1992 में दारा सिंह को पद्मश्री अवॉर्ड से नवाजा गया था.