Wednesday, 29 April, 2026

---विज्ञापन---

अमिताभ बच्चन से नफरत करता था ये सुपरस्टार, विलेन बन की थी करियर की शुरुआत, पीक पर लिया था संन्यास

बॉलीवुड में तमाम ऐसे एक्टर और एक्ट्रेस हैं, जिन्होंने वर्षों तक फिल्म इंडस्ट्री में काम किया. लेकिन अचानक अपने करियर के पीक पर आकर उन्होंने संन्यास ले लिया और फिल्मों से दूरी बना ली है. वहीं आज हम एक एक्टर के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में विलेन के तौर पर शुरुआत की थी. लेकिन बाद में हीरो का रोल किया था और इंडस्ट्री के सुपरस्टार बन गए थे. हालांकि एक वक्त ऐसा आया था, जब वह सब कुछ छोड़कर संन्यासी बन गए थे. तो चलिए जानते हैं उनके बारे में.

दरअसल, हम बात कर रहे हैं एक्टर विनोद खन्ना की. 6 अक्टूबर को पंजाब में जन्मे विनोद खन्ना ने अपने करियर की शुरुआत मेरा गांव मेरा देश से की थी. जिसमें वह विलेन बने थे. इस फिल्म से उन्हें अच्छी पहचान हासिल हुई थी. इसके बाद वह तमाम फिल्मों में बतौर लीड एक्टर नजर आए थे.

---Advertisement---

उसके बाद वह दो यार, हाथ की सफाई, कैद, पत्थर और पायल, प्रेम कहानी, हेरा फेरी, नेहले पे देहला, खून पसीना, हत्या, अमर अकबर एंथनी, जैसी कई फिल्मों में काम किया. हालांकि अपने करियर के पीक पर आकर उन्होंने संन्यास ले लिया था और वह ओशो की शरण में चले गए थे. जहां उन्होंने लंबे वक्त तक अपना समय बिताया. उनके इस फैसले से बॉलीवुड में तमाम लोगों को झटका लगा था. लोग हैरान रह गए थे. उन्होंने माली के तौर पर भी काम किया.

वहीं, हाल ही में ओशो के भाई स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने विनोद खन्ना को लेकर एक हैरान करने वाला खुलासा किया है. उन्होंने बताया है कि जब विनोद खन्ना ने अपना करियर छोड़ा था तो उनकी जगह को अमिताभ बच्चन ने भरा था और तेजी से उनका उदय हुआ था. ओशो के मुताबिक इस बदलाव से विनोद खासा प्रभावित थे. ओशो के भाई ने बताया कि विनोद गुमसुम और दुखी रहते थे. जिससे कई लोगों को लगता था कि उन्हें परिवार और बच्चों की याद आती है, लेकिन ओशो की सोच इससे परे थी.

---Advertisement---

ओशो के भाई ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि, " उन्होंने देखा कि विनोद उदास हैं और उन्होंने उनके आसपास के लोगों से पूछा कि उन्हें क्या परेशान कर रहा है. लोगों ने कहा कि उन्हें अपने परिवार की याद आ रही है, लेकिन ओशो की यकीन नहीं हुआ. सरस्वती ने कहा, " विनोद का मन उन्हें यह समझाने की कोशिश कर रहा था कि वो एक नेक इंसान हैं, जिन्हें अपने परिवार की याद आती है. लेकिन ओशो ने कहा कि वह वास्तव में उन्हें अपने रुतबे, टॉप जगह की कमी खल रही थी. वे अमिताभ बच्चन से नफरत करते थे और यह पीड़ा दूसरे रूपों में दिखती थी.

बता दें कि विनोद खन्ना ने ओशो के आश्रम में पांच साल तक रहने के बाद 1980 के दशक में वापसी की. उन्होंने फिर फिल्मों में एंट्री ली और कई हिट फिल्में दी. साथ ही बाद में उन्होंने पॉलिटिक्स में कदम रखा और अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री के तौर पर काम किया. हालांकि 27 अप्रैल 2017 को एक्टर का कैंसर की बीमारी के कारण निधन हो गया.

First published on: Apr 27, 2026 11:06 PM

Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 on Facebook, Twitter.