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61 साल से अटूट है ये रिकॉर्ड! इस फिल्म ने 525 दिन तक थिएटरों में मचाया था तहलका, ‘धुरंधर’ भी नहीं दिखा पाई ये दम
आज के दौर में जहां बड़ी से बड़ी फिल्में कुछ हफ्तों बाद ही सिनेमाघरों से गायब हो जाती है, वहीं हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है, जो पिछले 61 सालों से कायम है. यह रिकॉर्ड किसी खान सुपरस्टार या मौजूदा दौर के मेगास्टार के नाम नहीं, बल्कि बॉलीवुड के 'जुबली कुमार' कहे जाने वाले राजेंद्र कुमार के नाम दर्ज है.
इस फिल्म के नाम दर्ज है रिकॉर्ड
राजेंद्र कुमार की साल 1965 में रिलीज हुई फिल्म 'आरजू' ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा कमाल किया था, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है. इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म ने सिर्फ कमाई ही नहीं की, बल्कि करीब 525 दिनों तक सिनेमाघरों में लगातार चलकर इतिहास रच दिया. यही वजह थी कि इसे उस दौर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में गिना गया और फिल्म को प्लेटिनम जुबली का सम्मान भी मिला.
फिल्म को लेकर था जबरदस्त क्रेज
उस समय दर्शकों में फिल्म को लेकर जबरदस्त क्रेज देखने को मिला था. थिएटरों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लगती थीं और टिकट पाना आसान नहीं होता था. यही कारण था कि 'आरजू' ने रिलीज के बाद कई महीनों तक बॉक्स ऑफिस पर अपना दबदबा बनाए रखा.
इस एक्ट्रेस के साथ जमीं थी जोड़ी
फिल्म में राजेंद्र कुमार के साथ खूबसूरत एक्ट्रेस साधना शिवदासानी नजर आई थीं. दोनों की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब पसंद किया. इसके अलावा फिरोज खान, नाजिमा और नाजिर हुसैन जैसे कलाकारों ने भी अपने शानदार अभिनय से फिल्म को खास बना दिया.
बेहतरीन था फिल्म का म्यूजिक
'आरजू' की सफलता में इसके म्यूजिक का भी बड़ा योगदान था. फिल्म के गाने 'ऐ फूलों की रानी' और 'बेदर्दी बालमा' उस दौर के चार्टबस्टर साबित हुए थे. रेडियो से लेकर शादी-ब्याह और महफिलों तक इन गीतों की धूम सुनाई देती थी. आज भी ये गाने पुराने संगीत प्रेमियों की पसंदीदा प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं.
'जुबली कुमार' के नाम से थे फेमस
1960 का दशक राजेंद्र कुमार के करियर का स्वर्णिम दौर माना जाता है. लगातार हिट फिल्मों की वजह से उन्हें 'जुबली कुमार' का नाम मिला था. हालांकि, उनकी कई फिल्में सुपरहिट रहीं, लेकिन 'आरजू' ने जो रिकॉर्ड बनाया, वह आज भी अटूट है.
आज तक बरकरार है रिकॉर्ड
समय बदला, सिनेमा का अंदाज बदला और दर्शकों की पसंद भी बदल गई, लेकिन 'आरजू' का 525 दिनों तक थिएटरों में चलने का रिकॉर्ड अब भी कायम है. यही वजह है कि 61 साल बाद भी इस फिल्म का नाम हिंदी सिनेमा के सबसे सुनहरे अध्यायों में शुमार किया जाता है.