Drishyam 3 Review: अजय देवगन और जयदीप अहलावत की ‘दृश्यम 3’ एक बार फिर अपने सस्पेंस से दर्शकों को उलझाने वाली है. लेकिन विजय सलगांवकर की कहानी में ऐसा क्या जादू है, जो दर्शकों को हर बार उसके अगले कदम के बारे में सोचने पर मजबूर कर देता है? Drishyam: The Conclusion इसका जवाब अपने बेहद कसे हुए स्क्रीनप्ले और दिलचस्प पटकथा के जरिए देती है. फिल्म की शुरुआत से ही सस्पेंस और रहस्य का ऐसा माहौल बनता है कि दर्शक एक पल के लिए भी अपनी पलकें नहीं झपका पाते. कहानी का हर मोड़ नया रोमांच पैदा करता है.
अजय देवगन की जबरदस्त एक्टिंग
अजय देवगन ने एक बार फिर विजय सलगांवकर के किरदार में अपनी असाधारण अभिनय क्षमता साबित की है. उनके संवाद भले ही कम और नपे-तुले हों, लेकिन उनकी आँखों के भाव और चेहरे के एक्सप्रेशन्स में किरदार की पूरी कहानी साफ नजर आती है. बिना ज्यादा बोले सिर्फ अपनी खामोशी से दर्शकों तक तनाव और भावनाएं पहुंचाना अजय देवगन की सबसे बड़ी ताकत है.
जयदीप अहलावत का दमदार स्वैग
जयदीप अहलावत इस फिल्म के दूसरे सबसे बड़े और मुख्य आकर्षण हैं. उनका स्टाइल, शानदार स्क्रीन प्रेजेंस और दमदार अभिनय हर दृश्य में ध्यान खींचता है. अजय देवगन के साथ उनके आमने-सामने के सीन फिल्म के रोमांच को दोगुना कर देते हैं. इसके अलावा तब्बू, रजत कपूर और प्रकाश राज ने भीi अपने-अपने किरदारों में जान फूंक दी है और कहानी को मजबूत सहारा दिया है.
कसा हुआ डायरेक्शन और बेहतरीन स्क्रिप्ट
अभिषेक पाठक का निर्देशन फिल्म के रहस्य को बेहद समझदारी और मजबूती से आगे बढ़ाता है. लेखक आमिल कियान खान की लेखनी ने स्क्रीनप्ले को इतना रोचक बनाया है कि पहला हाफ दर्शकों को लगातार बांधे रखता है.
क्लाइमैक्स और कोर्टरूम ड्रामा
फिल्म का दूसरा हाफ और विशेष रूप से कोर्टरूम ड्रामा इसकी सबसे बड़ी यूएसपी है. अदालत के दृश्य में पूछा गया हर सवाल, हर जवाब और छोटी से छोटी जानकारी कहानी के मुख्य सूत्र से जुड़ती नज़र आती है. यही बारीकियां इस फिल्म को एक मास्टरपीस थ्रिलर का दर्जा देती हैं.
रेटिंग
कुल मिलाकर, Drishyam: The Conclusion सस्पेंस, बेहतरीन अदाकारी और मजबूत लेखन का एक शानदार मेल है. अगर आप थ्रिलर फिल्मों के शौकीन हैं, तो इसे बिल्कुल मिस न करें. इसे 5 में से 4 स्टार मिलते हैं.