Actress Cancer Journey Pain Struggle: बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे इन दिनों अपने रियलिटी शो ‘पति पत्नी और पंगा 2’ को लेकर सुर्खियों में हैं. जैसा कि हम सभी जानते हैं, सोनाली बेंद्रे बॉलीवुड की उन एक्ट्रेसेस में से एक हैं, जिन्होंने कैंसर को मात देकर जिंदगी की नई शुरुआत की. सोनाली अक्सर कैंसर से जूझने के दौरान आई चुनौतियों के बारे में खुलकर बात करती हैं. हाल ही में उन्होंने उस ताकत और दर्द के बारे में बताया, जिसे उन्होंने कैंसर से लड़ते हुए महसूस किया था. सोनाली ने बताया कि उन्होंने कभी कैंसर को जंग की तरह नहीं देखा. असहनीय दर्द से गुजरने के बावजूद उन्होंने खुद से प्यार करना नहीं छोड़ा. चलिए जानते हैं कि इस बारे में सोनाली ने क्या कहा.
कैंसर से उबरने के बाद…
दरअसल, सोनाली बेंद्रे हाल ही में माधुरी दीक्षित द्वारा होस्ट किए जा रहे मराठी शो ‘कौन होणार करोड़पति’ के प्रीमियर में पहुंचीं. यहां बातचीत के दौरान माधुरी ने कैंसर के दौरान सोनाली की हिम्मत और मजबूती की तारीफ की. इस दौरान दोनों एक्ट्रेसेस मराठी में बात करती नजर आईं. माधुरी ने सोनाली से कहा, ‘आपने कई अलग-अलग चीजों का अनुभव किया है. कैंसर से उबरने के बाद हमें आपका एक नया रूप देखने को मिला. हमने आपको एक मजबूत सोनाली के रूप में उभरते हुए देखा.’
The “Marathi Girls” are lighting up the stage! 🤩🔥 Madhuri Dixit hosts, Sonali Bendre takes the hot seat, and a playful request for a film together adds to the fun! 🎬❤️ 📺 #KonHonarCrorepati premieres 12th Oct, 9 PM on Sony Marathi & Sony LIV. #MadhuriDixit #SonaliBendre https://t.co/45gc9mRJ99
— Adgully (@adgully) October 12, 2026
मैंने इससे बहुत कुछ सीखा…
इसके जवाब में सोनाली ने कहा, ‘मेरा मतलब है, आप जानते हैं, हम हमेशा कहते हैं कि किसी ने कैंसर पर जीत हासिल कर ली है. लेकिन मजाक छोड़िए, हम ये सब बातें हंसते-हंसते और मजाक करते हुए कहते हैं. उस समय हमारा असल मकसद सिर्फ कैंसर को दूर करना नहीं था. मकसद यह समझना भी था कि ऐसा क्यों हो रहा है और मैं इससे क्या सीख सकती हूं. यकीन मानिए, मैंने इससे बहुत कुछ सीखा और मैंने इसे इसी नजरिए से देखा.’
कैसे करूं खुद से प्यार?
सोनाली बेंद्रे ने आगे बताया कि संघर्ष और जीत जैसी बातें किसी व्यक्ति को उसके अपने शरीर के खिलाफ खड़ा कर सकती हैं. अपनी सोच के बारे में बताते हुए सोनाली ने कहा, ‘क्योंकि मुझे लगता है कि जब हम कहते हैं कि हमने किसी चीज पर जीत हासिल कर ली है, तो यह कहीं न कही स्ट्रगल जैसा लगता है. कहीं न कहीं यह एक नेगेटिव फिलिंग है. आखिरकार, यह हमारा अपना शरीर ही तो है, है ना? कैंसर सेल्स भी हमारी ही सेल्स हैं. तो हम खुद से कैसे लड़ सकते हैं? मैं अपने शरीर से प्यार कैसे करूं, जब वह मुझे इतना दर्द दे रहा हो? मैंने सोचा कि शायद मुझे अपने शरीर के साथ प्रेम से पेश आना चाहिए. किसी ऐसी चीज से प्यार करना बहुत मुश्किल है, जो आपको इतना दर्द दे रही हो. लेकिन मुझे लगता है कि शायद यही तरीका मेरे लिए कारगर साबित हुआ. यहीं से सब कुछ शुरू हुआ.’