Saturday, 17 October, 2026

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‘दो घंटे प्रोड्यूसर को रखा खड़े, पत्नी को कैंसर हुआ तो बने ढाल’, नाना पाटेकर को याद कर भावुक हुए शिवाजी साटम

नाना पाटेकर आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी दोस्ती उन्होंने जो काम किए और जो दोस्ती निभाई वो आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है, हाल ही में उनके दोस्त ने कुछ ऐसे खुलासे किए जो आपकी आंखें नम कर देंगे.

Nana Patekar and Shivaji Satam friendship
नाना पाटेकर से टूटे शिवाजी साटम बताया दोस्ती का किस्सा, Photo Credit- Social Media/AI

Nana Patekar-Shivaji Satam Friendship: नाना पाटेकर भले ही अपनी दमदार एक्टिंग और गुस्सैल अंदाज के लिए पहचाने जाते रहे हों, लेकिन असल जिंदगी में वह अपने दोस्तों के लिए किसी ढाल से कम नहीं थे. अब CID के मशहूर ACP प्रद्युमन यानी शिवाजी साटम ने अपने जिगरी दोस्त को याद करते हुए ऐसे किस्से सुनाए हैं, जिन्हें जानकर आप भी भावुक हो जाएंगे. करीब 40 साल की दोस्ती में नाना ने न सिर्फ शिवाजी के करियर में मदद की, बल्कि उनके मुश्किल वक्त में भी चट्टान बनकर खड़े रहे.

दोस्त को कम पैसे मिले तो प्रोड्यूसर पर भड़के नाना

नाना पाटेकर की प्रेयर मीट ‘आठवणीतले नाना’ में शिवाजी साटम ने अपनी दोस्ती के कई अनसुने किस्से शेयर किए. उन्होंने बताया कि नाना के कहने पर ही उन्होंने हिंदी फिल्मों में काम करना शुरू किया था. उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘यशवंत’ थी, जिसमें वह पुलिस अधिकारी के किरदार में नजर आए थे.

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कैसे हिंदी फिल्में करने को राजी हुए शिवाजी?

शिवाजी ने बताया कि शुरुआत में वह इस फिल्म को करने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन नाना के समझाने पर मान गए. हालांकि, जब नाना को पता चला कि उनके दोस्त को फिल्म के लिए कम पैसे मिले हैं, तो वह भड़क गए. शिवाजी ने उन्हें प्रोड्यूसर से बात करने के लिए मना भी किया, लेकिन नाना ने उनकी एक नहीं सुनी.

नाना का दिखा सख्त अंदाज

उन्होंने प्रोड्यूसर को बुलाया और करीब दो घंटे तक खड़ा रखा. शिवाजी के मुताबिक, नाना का यह अंदाज बिल्कुल वैसा था, जैसे स्कूल में गलती करने पर बच्चों को सजा मिलती थी. इस किस्से से साफ है कि नाना अपने दोस्तों के हक के लिए किसी से भी भिड़ने को तैयार रहते थे.

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पत्नी को कैंसर हुआ तो नाना ने संभाला मोर्चा

नाना की दोस्ती का सबसे भावुक किस्सा शिवाजी साटम की पत्नी की बीमारी से जुड़ा है. उन्होंने बताया कि जब वह फिल्म ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ की शूटिंग कर रहे थे, उसी दौरान उनकी पत्नी को कैंसर होने का पता चला. इस खबर ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था. वह फिल्म छोड़ने तक के बारे में सोचने लगे थे.

‘मुश्किल वक्त में नाना ने नहीं छोड़ा साथ’

ऐसे मुश्किल समय में नाना ने उनका साथ नहीं छोड़ा. शिवाजी के मुताबिक, नाना ने फिल्म के निर्देशक पार्थो घोष और अन्य लोगों से बात की, ताकि शूटिंग का समय ऐसा रखा जा सके कि वह काम के बाद अपनी पत्नी के पास लौट सकें. इसके बाद उनके लिए दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक का शेड्यूल तय किया गया.

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नाना ने भावुक होकर कही दिल चीर देने वाली बात

शिवाजी ने भावुक होकर कहा कि नाना ने उनके लिए इतना कुछ किया, जितना शायद उनका सगा भाई भी नहीं कर पाता.

दोस्तों को अचानक बुला लेते थे अपने फार्म पर

शिवाजी ने बताया कि नाना का दोस्ती निभाने का तरीका भी बेहद खास था. वह कभी भी फोन करके पूछ लेते थे कि क्या कर रहे हो और फिर सीधे अपने फार्म पर आने के लिए कह देते थे. बहरहाल, करीब चार दशक पुरानी दोस्ती को याद करते हुए शिवाजी के लिए नाना को खोने का दर्द साफ नजर आया.

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First published on: Oct 17, 2026 10:33 AM

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