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शमशान घाट पर मिली जख्मी महिला को बनाया मां, आशीर्वाद से चमकी किस्मत! आज करोड़ों में खेलते हैं सुदेश लहरी?
अपनी शानदार टाइमिंग और मजेदार अंदाज से लोगों को हंसाने वाला ये कॉमेडियन आज किसी पहचान का मोहताज नहीं हैं. दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाले इस एक्टर का एक ऐसा फैसला, जिसने उनकी पूरी जिंदगी के मायने को ही बदलकर रख दिया.
कॉमेडी की दुनिया का एक ऐसा मास्टरपीस जिसने अपनी कॉमिक टाइमिंग से हर किसी को गुद-गुदा दिया, जिसके जोक्स लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला देते हैं, उस एक्टर की जिंदगी कभी गरीबी के अंधकार में गुजरी, चाय की दुकान पर काम करने से लेकर कुल्फी बेचने तक का किया काम, लेकिन हर दिन ठोकरों का करना पड़ता था सामना फिर एक दिन शमशान घाट पर एक जख्मी हाल में दिखी महिला को घर में मां बनाकर रखा... की सेवा... रखा ख्याल, फिर किस्मत ने ऐसे ली करवट की आज नहीं हैं किसी पहचान के मोहताज. जिसे पूरी दुनिया सुदेश लहरी के नाम से जानती है.
शोहरत के आसमान पर कैसे पहुंचे सुदेश?
छोटे पर्दे पर अपनी कॉमेडी से दर्शकों का दिल जीतने वाले सुदेश ने जिंदगी में खूब नाम और शोहरत कमाई है, लेकिन एक वक्त में जब उनके पास दो वक्त की रोटी के लिए भी पैसे नहीं होते थे. परिवार का पेट भरने के लिए उन्हें अपनी ट्रॉफी तक बेचनी पड़ी थी.
कभी चाय बेची, तो कभी कुल्फी बेचकर चलाया घर
सुदेश लहरी ने कई इंटरव्यू में अपने संघर्ष के दिनों को याद किया. उन्होंने बताया था कि बचपन में उनके परिवार की आर्थिक हालत बेहद खराब थी. घर चलाने के लिए उन्हें छोटी उम्र में ही काम करना पड़ा. कभी चाय की दुकान पर काम किया, तो कभी फैक्ट्रियों में चाय पहुंचाई. इतना ही नहीं, उन्होंने जूते और कार बनाने वाली फैक्ट्रियों में भी काम किया. वह कुल्फी बेचने से लेकर हलवा, बर्फी और समोसे बनाने तक का काम कर चुके हैं.
सुदेश का गरीबी में बीता समय
सुदेश ने बताया था कि गरीबी का आलम ऐसा था कि कई बार घर में चाय तक नहीं बन पाती थी. चाय की दुकान पर काम करते समय वह कभी-कभी एक कप में थोड़ी चाय डालकर पी लेते थे और फिर कप साफ करके वापस कर देते थे. उनके पास पहनने के लिए चप्पलें तक नहीं थीं.
परिवार के लिए बेच दी थी ट्रॉफी
सुदेश लहरी ने मनीष पॉल के थ्रोबैक पॉडकास्ट में बताया था कि आर्थिक तंगी के कारण वह एक्टिंग की क्लास नहीं ले सके. हालांकि, अलग-अलग काम करते हुए उन्होंने लोगों के बोलने और व्यवहार करने के तरीके को करीब से समझा, जो आगे चलकर उनकी कॉमेडी और एक्टिंग में काम आया.
अंग्रेजी न आने की वजह से उठाया नुकसान
एक दूसरे पॉडकास्ट में उन्होंने यह भी बताया कि अंग्रेजी अच्छी तरह न आने के कारण एक बार उन्होंने 50 हजार रुपये की जगह महज 15 हजार रुपये में शो करने की बात कह दी थी. वहीं, परिवार को खाना खिलाने के लिए उन्हें अपनी ट्रॉफी भी सिर्फ 300-400 रुपये में बेचनी पड़ी थी.
महिला ने दिया था आशीर्वाद!
सुदेश की जिंदगी से जुड़ा एक भावुक किस्सा कृष्णा अभिषेक ने 'लाफ्टर शेफ' के सेट पर सुनाया था. कृष्णा के मुताबिक, सुदेश एक बार किसी के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे. वहां उन्हें शमशान घाट के एक कोने में जख्मी हालत में बैठी महिला दिखाई दी. वह उसे अपने घर ले आए और मां की तरह उसकी देखभाल की.
सुदेश का इंडस्ट्री में है नाम
कृष्णा ने बताया कि मरने से पहले उस महिला ने सुदेश को आशीर्वाद दिया था कि उनका कभी बुरा नहीं होगा और वह जिंदगी में खूब सफल होंगे. कृष्णा के मुताबिक, इसके बाद सुदेश को मुंबई से काम का फोन आया और उनकी जिंदगी बदलने लगी. आज सुदेश इंडस्ट्री का एक पॉपुलर नाम हैं जिन्हें किसी पहचान की जरूरत नहीं है.
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