Tuesday, 14 July, 2026

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रोहित चंदेल से पहले भी POCSO केस में फंसे थे ये 4 सितारे, कोई हुआ बरी तो किसी का अब भी जारी है ट्रायल

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टीवी एक्टर रोहित चंदेल की गिरफ्तारी के बाद एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक बार फिर पुराने POCSO मामलों की चर्चा तेज हो गई है. रोहित पर एक नाबालिग को-एक्ट्रेस की शिकायत के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) और POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. फिलहाल मामले की जांच जारी है और अदालत में इसकी सुनवाई होनी बाकी है.

POCSO केस में फंसे अभिनेता

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब किसी अभिनेता का नाम POCSO मामले में सामने आया हो. इससे पहले भी टीवी और मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकार ऐसे आरोपों का सामना कर चुके हैं. इनमें कुछ को अदालत से राहत मिली, जबकि कुछ मामलों में कानूनी प्रक्रिया अब भी जारी है.

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पर्ल वी पुरी

पर्ल वी पुरी का नाम साल 2021 में सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा था. 'नागिन 3' फेम अभिनेता को एक नाबालिग से जुड़े कथित यौन शोषण के मामले में गिरफ्तार किया गया था. वह कुछ समय तक न्यायिक हिरासत में भी रहे. बाद में जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान उन्हें राहत मिली और अदालत से वे बरी हो गए.

पार्थ समथान

पार्थ समथान भी साल 2017 में विवादों में आए थे. उन पर एक मॉडल ने आरोप लगाया था कि नाबालिग रहते हुए उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया था. शिकायत के आधार पर POCSO की धाराएं जोड़ी गई थीं, लेकिन जांच के दौरान पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर मामला बंद हो गया और पार्थ को कानूनी राहत मिल गई.

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श्रीजीत रवि

मलयालम फिल्मों के अभिनेता श्रीजीत रवि को साल 2022 में नाबालिग बच्चों के सामने कथित अश्लील हरकत करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उन्हें बाद में जमानत मिल गई, लेकिन यह मामला अभी भी अदालत में लंबित है और ट्रायल जारी है.

कूटीकल जयचंद्रन

वहीं, मलयालम अभिनेता और टीवी होस्ट कूटीकल जयचंद्रन के खिलाफ साल 2024 में चार साल की बच्ची के साथ कथित गलत हरकत की कोशिश का मामला दर्ज हुआ था. इस केस की जांच के बाद कानूनी प्रक्रिया चल रही है और अंतिम फैसला आना बाकी है. अब बात रोहित चंदेल की करें तो उनका मामला अभी शुरुआती चरण में है. पुलिस जांच जारी है और अदालत में सुनवाई के बाद ही आगे की स्थिति साफ होगी.

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रोहित चंदेल

गौर करने वाली बात यह है कि POCSO जैसे मामलों में एफआईआर दर्ज होना या गिरफ्तारी होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं होता. कानून के मुताबिक, किसी भी आरोपी को तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक अदालत सबूतों के आधार पर अपना अंतिम फैसला नहीं सुनाती. ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय केवल न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होता है.

First published on: Jul 14, 2026 11:26 AM

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