---विज्ञापन---
बॉलीवुड के इस डायरेक्टर ने अपनी सगी बहन की बेटी से की थी शादी, परिवार में पड़ गई थी दरार

बॉलीवुड के एक मशहूर निर्देशक जिन्हें पूरी इंडस्ट्री प्यार से 'गोल्डी' के नाम से जानती थी. उन्होंने सस्पेंस और थ्रिलर फिल्मों में जो जादू बुना, वह आज भी सिनेमा के लिए एक बेंचमार्क है. हालांकि, उनकी अपनी निजी जिंदगी एक ऐसे विवाद में घिरी रही, जिसने जाने माने परिवार की नींव हिलाकर रख दी थी. दरअसल इस डायरेक्टर ने अपनी ही भांजी से शादी की थी.

सगी भांजी से शादी- बॉलीवुड के जिस डायरेक्टर के बारे में हम बात कर रहे हैं, उसने अपनी सही भांजी से शादी की थी. ऐसा नहीं था कि शादी काफी आसान रही. इस शादी के चलते उनके घर के काफी कलह भी हुई.

कौन था वो डायरेक्टर?- अपनी सही बहन की बेटी से शादी करने वाला डायरेक्टर कोई और नहीं, बल्कि बॉलीवुड के 'सस्पेंस मास्टर' विजय आनंद थे.उनकी बहन शील कांता कपूर की बेटी सुषमा कोहली, रिश्ते में उनकी सगी भांजी थीं. जब दोनों के बीच प्रेम पनपा, तो यह न केवल आनंद परिवार के लिए, बल्कि पूरे बॉलीवुड के लिए एक गहरा सदमा था.

परिवार में 'महाभारत'- जब विजय आनंद ने अपने भाइयों—चेतन आनंद और देव आनंद—के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, तो घर में कोहराम मच गया. भाइयों ने इसे अनैतिक और हिंदू मान्यताओं के खिलाफ बताते हुए इस रिश्ते को पूरी तरह नकार दिया. इस शादी की वजह से घर में लंबे समय तक बातचीत बंद रही.

हिंदू मैरिज एक्ट की बाधा- हिंदू मैरिज एक्ट (सपिंड विवाह) के तहत सगे खून के रिश्तों में शादी पूरी तरह वर्जित है. इसके बावजूद विजय आनंद अपने फैसले पर कायम रहे और 1978 में उन्होंने गुपचुप तरीके से सुषमा से शादी कर ली. इस कदम ने उन्हें अपने परिवार से कुछ समय के लिए अलग कर दिया था.

अटूट रहा रिश्ता- तमाम सामाजिक आलोचनाओं और परिवार की नाराजगी के बावजूद, विजय और सुषमा का रिश्ता उम्र भर कायम रहा. उनका एक बेटा, विभु आनंद भी हुआ. सुषमा 2004 में गोल्डी के निधन तक उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं, जो इस बात का सबूत था कि वे समाज की परवाह किए बिना साथ रहना चाहते थे.

सिनेमा का 'गोल्डन टच' और विवाद- एक तरफ विजय आनंद ने 'गाइड', 'जॉनी मेरा नाम' और 'तीसरी मंजिल' जैसी कालजयी फिल्में दीं, तो दूसरी तरफ उनकी निजी जिंदगी के इस विवाद ने उन्हें हमेशा चर्चाओं में रखा. यह कहानी आज भी बॉलीवुड के उन चुनिंदा किस्सों में से है जो प्यार की सीमाओं और सामाजिक नैतिकता के बीच के संघर्ष को दर्शाते हैं.