Actor Sudesh Kumar Dhawan Passes Away: क्लासिक दौर के मशहूर अभिनेता सुदेश कुमार धवन का निधन हो गया है. जहां उनके निधन की पुष्टि उनकी बेटी मिशिका धवन जमतानी ने की है. सुदेश कुमार ने उस दौर में अपनी पहचान बनाई थी जब सिनेमा अपनी सादगी और मजबूत किरदारों के लिए जाना जाता था. उन्होंने न केवल मुख्य भूमिकाएं निभाईं, बल्कि चरित्र अभिनेता के तौर पर भी अपनी गहरी छाप छोड़ी. अपने शुरुआती दिनों में ‘पृथ्वी थिएटर’ से जुड़े रहने के कारण उनकी अभिनय कला में एक अलग ही गहराई थी. राज कपूर की कई परियोजनाओं का हिस्सा रहे सुदेश कुमार ने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन की बारीकियों में भी अपना योगदान दिया. शिवाजी पार्क श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां सिनेमा जगत के कई लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी.
कल्ट फिल्मों का हिस्सा
सुदेश कुमार ने अपने लंबे करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया. 1959 की सुपरहिट फिल्म ‘छोटी बहन’ और 1961 की ‘सारंगा’ में उनकी भूमिकाओं को आज भी याद किया जाता है. ‘पैसे’ (1957) और ‘रॉकेट गर्ल’ (1962) जैसी फिल्मों में उन्होंने नायक के रूप में अपनी काबिलियत साबित की थी.
चरित्र भूमिकाओं में छोड़ी छाप
एक लीड एक्टर होने के साथ-साथ वे एक मंझे हुए चरित्र अभिनेता भी थे. उन्होंने ‘खानदान’, ‘वारिस’, ‘धरती’ और ‘मन मंदिर’ जैसी फिल्मों में वकील, डॉक्टर और प्रोफेसर जैसे महत्वपूर्ण सहायक किरदार निभाए. उनके किरदारों में एक तरह की गरिमा और ठहराव देखने को मिलता था.
पृथ्वी थिएटर और राज कपूर से जुड़ाव
सुदेश कुमार उन चुनिंदा कलाकारों में से थे जिन्होंने अभिनय की बारीकियां ‘पृथ्वी थिएटर’ से सीखी थीं. इसी जुड़ाव की वजह से उन्हें शोमैन राज कपूर के साथ काम करने का मौका मिला. उन्होंने राज कपूर के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में अपना रचनात्मक योगदान दिया था.
निर्देशन में भी आजमाया हाथ
अभिनय के अलावा सुदेश कुमार फिल्म निर्माण की तकनीकी समझ भी रखते थे. वे 1966 की मशहूर फिल्म ‘दो बदन’ के सहायक निर्देशक भी रहे. यह फिल्म अपनी कहानी और संगीत के लिए आज भी बॉलीवुड की बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाती है.
‘सुर’ थी आखिरी फिल्म
सुदेश कुमार लंबे समय तक फिल्मी चकाचौंध से दूर यानी ‘वनवास’ में रहे, लेकिन अभिनय के प्रति उनका प्रेम कभी कम नहीं हुआ. साल 2002 में आई फिल्म ‘सुर’ उनकी आखिरी फिल्म थी. 95 साल की उम्र तक उन्होंने एक भरपूर और प्रेरणादायक जीवन जिया.