Tuesday, 28 July, 2026

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रामानंद सागर के बेटे आनंद सागर ने दुनिया को कहा अलविदा, शोक में डूबी पूरी इंडस्ट्री

Anand Ramanand Sagar Passes Away: आनंद रामानंद सागर का निधन भारतीय टेलीविजन जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. 'रामायण' जैसी अमर कृति की विरासत को सहेजने वाले इस दिग्गज निर्माता ने अपनी पूरी उम्र भारतीय संस्कृति और महाकाव्यों को घर-घर पहुंचाने में समर्पित कर दी.

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Anand Ramanand Sagar Passes Away: भारतीय टेलीविजन इतिहास के सबसे प्रतिष्ठित और लोकप्रिय धारावाहिक ‘रामायण’ के निर्माता रामानंद सागर के परिवार के लिए आज का दिन बेहद दुखद रहा. रामानंद सागर के सुपुत्र और प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक आनंद रामानंद सागर चोपड़ा का निधन हो गया है. उनके जाने से न केवल सागर परिवार, बल्कि पूरी टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है.

आनंद सागर का निधन

आनंद रामानंद सागर के निधन की जानकारी मिलते ही कला जगत के कई लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे. उनके परिजनों ने सोशल मीडिया के जरिए इस अपार दुख को साझा किया. आज शाम 4:30 बजे मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ.

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परिवार ने दी भावुक श्रद्धांजलि

इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके परिवार ने एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, “अत्यंत दुख के साथ हम अपने प्रिय पिता आनंद रामानंद सागर चोपड़ा के निधन की सूचना साझा कर रहे हैं. इस संदेश के साथ ही उन्होंने अंतिम संस्कार के विवरण भी साझा किए, ताकि उनके चाहने वाले उन्हें आखिरी विदाई दे सकें.

कई सेलिब्रिटीज पहुंचे

आनंद सागर के निधन की खबर सुनते ही कई पूनम ढिल्लो, भाग्यश्री और हिमालय दासानी सहित कई सेलिब्रिटीज उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे. आनंद सागर के निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री ने शोक की लहर दौड़ पड़ी है.

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पिता की पौराणिक विरासत के बने सारथी

आनंद सागर ने अपने पिता रामानंद सागर द्वारा स्थापित ‘सागर आर्ट्स’ की विरासत को न केवल संभाला, बल्कि उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उन्होंने कई पौराणिक और भक्तिपूर्ण प्रोजेक्ट्स के निर्माण और मैनेजमेंट में मुख्य भूमिका निभाई. उनका मानना था कि भारतीय महाकाव्यों की कहानियों को हर पीढ़ी तक उसी पवित्रता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाना चाहिए.

लॉकडाउन में ‘रामायण’ की वापसी और आनंद सागर

साल 2020 में जब देशव्यापी लॉकडाउन लगा था, तब ‘रामायण’ का पुनः प्रसारण किया गया था. इस दौरान शो ने दुनिया भर में व्यूअरशिप के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. ‘रामायण’ और अन्य क्लासिक प्रोजेक्ट्स को आधुनिक समय में भी प्रासंगिक बनाए रखने और उनकी मूल भावना को सुरक्षित रखने में आनंद सागर का योगदान अविस्मरणीय रहा.

आस्था आधारित कार्यक्रमों के पर्याय

आनंद सागर की देखरेख में सागर ब्रांड हमेशा ‘आस्था’ और ‘संस्कृति’ से जुड़े कार्यक्रमों का पर्याय बना रहा. उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि तकनीक भले ही बदल जाए, लेकिन कहानियों की रूह वही रहनी चाहिए जो उनके पिता ने शुरू की थी. उनके निधन को मनोरंजन जगत के लिए एक बड़ी व्यक्तिगत और पेशेवर क्षति माना जा रहा है.

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First published on: Feb 13, 2026 08:50 PM

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