Wednesday, 12 August, 2026

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‘कांतारा’ विवाद में रणवीर सिंह को कर्नाटक हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, कहा- ‘आप भूल सकते हैं, लेकिन इंटरनेट…’

Kantara controversy: यह मामला एक बड़े सबक की तरह है कि कला और मनोरंजन के नाम पर किसी की आस्था और परंपरा का मजाक उड़ाना भारी पड़ सकता है. रणवीर सिंह ने हालांकि माफी मांग ली है, लेकिन कानून की नजर में 'इरादा' और 'लापरवाही' के बीच का फर्क अब कोर्ट तय करेगा.

Ranveer Singh Kantara controversy: बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह इन दिनों अपनी एक पुरानी हरकत की वजह से कानूनी पचड़ो में फंसे हुए हैं. फिल्म ‘कांतारा’ के एक पवित्र दृश्य का मजाक बनाने के आरोप में घिरे रणवीर को कर्नाटक हाई कोर्ट से अस्थायी राहत तो मिली है, लेकिन अदालत ने उनके व्यवहार को लेकर सख्त टिप्पणी भी की है.

2 मार्च तक गिरफ्तारी पर रोक

कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने रणवीर सिंह को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या जबरदस्ती कार्रवाई पर 2 मार्च तक रोक लगा दी है. इसका मतलब है कि अगली सुनवाई तक पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकेगी.

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कोर्ट की कड़ी फटकार

राहत देने के साथ ही जज ने रणवीर सिंह को उनके गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के लिए फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि आप चाहे कितने भी बड़े स्टार क्यों न हों, आपको किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है. सार्वजनिक मंचों पर एक अभिनेता की जिम्मेदारी आम नागरिक से कहीं ज्यादा होती है.

‘डिजिटल दुनिया’ की चेतावनी

सुनवाई के दौरान जज ने एक बहुत गहरी बात कही. उन्होंने रणवीर को लापरवाह बताते हुए कहा कि इंटरनेट पर डाली गई कोई भी चीज कभी पूरी तरह नहीं मिटती. आप अपने शब्द वापस ले सकते हैं, लेकिन डिजिटल दुनिया में वह कंटेंट हमेशा के लिए दर्ज हो जाता है. इसलिए बोलते समय बहुत सोच-समझकर कदम उठाना चाहिए.

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क्या था पूरा मामला?

यह विवाद पिछले साल 28 नवंबर 2025 को गोवा में आयोजित IFFI (इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया) के दौरान शुरू हुआ था. वहां एक कार्यक्रम में रणवीर सिंह ने फिल्म ‘कांतारा’ के ‘दैव’ वाले पवित्र दृश्य की नकल उतारी थी. इसी को लेकर जनवरी 2026 में बेंगलुरु में उनके खिलाफ हिंदू भावनाओं और कर्नाटक की प्राचीन ‘चावुंडी दैव’ परंपरा का अपमान करने के आरोप में FIR दर्ज की गई थी.

वकील की दलील और कानूनी धाराएं

रणवीर के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि उनका इरादा किसी की भावनाएं आहत करने का नहीं था और यह केवल एक अनजाने में हुई लापरवाही थी. हालांकि, मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 और 299 जैसी गंभीर धाराओं में दर्ज है, जो नफरत फैलाने और धार्मिक अपमान से जुड़ी हैं. अब 2 मार्च को तय होगा कि यह मामला रद्द होगा या जारी रहेगा.

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First published on: Feb 24, 2026 06:08 PM

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