Thursday, 30 April, 2026

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इंडिया की वो पहली फीमेल कॉमेडियन जो गुमनामी के अंधेरे में हुई गुम, चॉल के छोटे से कमरे में काटी जिंदगी

बॉलीवुड की एक ऐसी अभिनेत्री जिसने अपने पहले गाने से तहलका मचा दिया था, इसके बाद अपनी कॉमिक टामिंग से दर्शकों को खूब गुद-गुदाया, लेकिन उनका अपना खुद का पूरा जीवन सिर्फ दर्द और तकलीफ में बीता.

भारतीय सिनेमा की चमक-दमक के पीछे कई ऐसी कहानियां छिपी हैं, जो जितनी इंस्पायरिंग हैं, उतनी ही दर्दभरी भी… ऐसी ही एक कहानी है, उमा देवी खत्री की, जिन्हें देश की पहली महिला कॉमेडियन के तौर पर जाना जाता है. 1923 में उत्तर प्रदेश के अमरोहा के पास जन्मी उमा देवी का बचपन बेहद कठिनाइयों में बीता. महज 2 साल की उम्र में उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया. रिश्तेदारों के साथ पली-बढ़ीं उमा को प्यार नहीं, बल्कि तिरस्कार मिला, लेकिन उनके भीतर कुछ बड़ा करने का जज्बा हमेशा जिंदा रहा.

सपनों को सच करने निकली मुंबई की ओर

सिर्फ 23 साल की उम्र में, अपने सपनों को सच करने के लिए वो मुंबई पहुंच गईं. यहां उनकी मुलाकात मशहूर संगीतकार नौशाद से हुई. कहा जाता है, कि उमा ने उनसे साफ कह दिया था, कि अगर उन्हें मौका नहीं मिला, तो वो जान दे देंगी. उनकी जिद और जुनून देखकर नौशाद ने उन्हें एक मौका दिया.

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पहले गाने ने मचा दिया था तहलका

फिल्म ‘दर्द’ का गाना ‘अफसाना लिख रही हूं’ उनकी आवाज में रिलीज हुआ, और रातों-रात वो स्टार बन गईं, लेकिन ये सफलता ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई. धीरे-धीरे उन्हें गाने के मौके कम मिलने लगे. ऐसे में उमा देवी ने हार नहीं मानी और एक्टिंग की ओर रुख किया. यहीं से उनका नया सफर शुरू हुआ. कॉमेडियन ‘टुन टुन’ के रूप में….

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कॉमिक टामिंग ने बनाया दर्शकों की फेवरेट

अपने अलग अंदाज और कॉमिक टाइमिंग से उन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली. हालांकि, उनका सफर आसान नहीं था. अपने वजन को लेकर उन्हें बार-बार ताने सुनने पड़े और मजाक का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने करीब 198 फिल्मों में काम किया, और हर किरदार से लोगों को हंसाया.

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खुद आंसू पीकर, दूसरों के चेहरे पर लाईं मुस्कार

बता दें, कि जहां पर्दे पर वो लोगों को हंसाती थीं, वहीं उनकी निजी जिंदगी अकेलेपन और संघर्ष से भरी रही. अपने आखिरी दिनों में वो एक चॉल के छोटे से कमरे में गुमनामी के साथ जीवन बिताने को मजबूर थीं. साल 2003 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी जिंदा है.

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दर्शकों के दिलों में हमेशा रहेंगी जिंदा

उमा देवी खत्री ने ये साबित कर दिया, कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसला मजबूत हो तो इंसान अपनी पहचान बना ही लेता है. बहरहाल, भारतीय सिनेमा में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा. एक ऐसी कलाकार के रूप में, जिसने दर्द में भी मुस्कुराना और दूसरों को हंसाना नहीं छोड़ा.

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First published on: Apr 30, 2026 06:29 PM

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