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Chand Mera Dil Review: ‘आरू और चांद’ की कहानी, जब बॉलीवुड Aesthetic को Emotion समझने की गलती कर बैठता है

'चांद मेरा दिल' की कोई 'सैयारा' को टक्कर देने वाली फिल्म बता रहा, तो कुछ लोग इसे नई जेनेरेशन की 'कबीर सिंह' तक कह रहे हैं, लेकिन फिल्म देखने के बाद सबसे पहले एक बात क्लियर हो जाती है. ये 'कबीर सिंह' तो बिल्कुल नहीं है.

Movie name:चांद मेरा दिल
Director:विवेक सोनी
Movie Casts:लक्ष्य, अनन्या पांडे

Chand Mera Dil Review: ‘सैयारा’ बनने चली थी फिल्म, लेकिन कहानी इतनी खिंची कि प्यार भी बोझ लगने लगा.

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क्या है फिल्म की कहानी?

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जब ‘चांद मेरा दिल’ का ट्रेलर आया था, तभी से सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर काफी हाइप बनने लगी थी. कोई इसे ‘सैयारा’ को टक्कर देने वाली फिल्म बता रहा था, तो कुछ लोग इसे नई जेनेरेशन की ‘कबीर सिंह’ तक कह रहे थे. ट्रेलर देखकर लगा भी था, कि कोई बहुत इनटेंस और इमोशनल लव स्टोरी आने वाली है, लेकिन फिल्म देखने के बाद सबसे पहले एक बात क्लियर हो जाती है. ये ‘कबीर सिंह’ तो बिल्कुल नहीं है.

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हां, फिल्म ‘सैयारा’ वाला वही ड्रीमी निब्बा-निब्बी रोमांस का एहसास देने की कोशिश जरूर करती है, लेकिन कहानी इतनी ज्यादा ड्रैग होती जाती है, कि एक प्वॉइन्ट के बाद फिल्म कहीं की नहीं रह जाती.

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फिल्म की कहानी आरव और चांदनी की है, जो हैदराबाद के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ते हैं. दोनों मिलते हैं, प्यार में पड़ते हैं, और फिर एक-दूसरे के ‘आरू’ और ‘चांद’ बन जाते हैं. इसके बाद शादी, रिलेशनशिप प्रॉब्लम्स, इमोशनल ब्रेकडाउन और सेपरेशन बस यही फिल्म की पूरी कहानी है.

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प्रॉब्लम ये नहीं है, कि कहानी सिंपल है. प्रॉब्लम ये है, कि फिल्म के पास अपनी सिम्प्लीसिटी को इंटरेस्टिंग बनाने का तरीका ही नहीं है. टीनएज लवस्टोरी वाला फॉर्मूला क्यों नहीं कर पाया काम? बॉलीवुड में टीनएज और कॉलेड रोमांस हमेशा से हिट फॉर्मूला रहा है. ‘एक दूजे के लिए’ , ‘बॉबी’ , ‘जूली’ , ‘लव स्टोरी’ और हाल ही का उदाहरण ‘सैयारा’ जैसी फिल्मों ने इसी जॉनर में ऑडियंस का दिल जीता है, लेकिन ऐसी फिल्मों को चलाने के लिए तीन चीजें सबसे जरूरी होती हैं, स्ट्रॉग स्टोरी और डायरेक्शन, कंवेंसिंग कास्ट और सोलफुल म्यूजिक.

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‘चांद मेरा दिल’ म्यूजिक के मामले में तो अच्छा काम कर जाती है, लेकिन बाकी दोनों जगह फिल्म बुरी तरह लड़खड़ा जाती है. फिल्म की शुरुआत देखकर लगता है, कि कोई बहुत प्यारी लव स्टोरी देखने को मिलेगी, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, पता चलता है कि मेकर्स ने फिल्म में हर पॉसिबल इमोशनल टॉपिक डालने की कोशिश की है. फेमिनिज्म, मैरिज इश्यू, बेबी, पोस्टपार्टम डिप्रेशन ऐसा लगता है, कि कोई भी एलिमेंट छूटना नहीं चाहिए था, लेकिन इतने सारे मुद्दे डालने के बावजूद फिल्म ऑडियन्स को इमोशनली कनेक्ट नहीं करा पाती.

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लक्ष्य ने बचाई फिल्म, अनन्या पांडे बनीं सबसे कमजोर कड़ी

फिल्म की सबसे बड़ी स्ट्रेंथ लक्ष्य की परफॉर्मेंस है. इससे पहले ‘किल’ और ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ जैसी फिल्मों से वो साबित कर चुके हैं, कि वो शानदार एक्टर हैं, और यहां भी इमोशनल सीन्स में उन्होंने जेनुइनली अच्छा काम किया है. खासतौर पर ब्रेकगाउन वाले सीन्स में उनके एक्सप्रेशन्स काफी असर छोड़ते हैं.

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लेकिन दूसरी तरफ अनन्या पांडे फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी साबित होती हैं. सिर्फ एक्टिंग ही नहीं, उनके कैरेक्टर की राइटिंग भी बेहद कन्फ्यूजिंग है. कैरेक्टर को एक साथ टॉक्सिक, इमोशनल और अनसेफ दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन ऑडियंस उसके साथ कनेक्ट ही नहीं कर पाती. कई जगह उनका कैरेक्टर इरिटेशन पैदा करने लगता है. मतलब कैरेक्टर खुद गलतियां करेगा, लेकिन कोई कुछ बोल दे तो उसे तगड़ा बुरा भी लग जाएगा.

फिल्म देखते हुए कई जगह ये सवाल भी आता है, कि करण जौहर ने अगर धर्मा प्रोडक्शन्स के 50 परसेंट शेयर बेच दिए हैं, तो क्या क्रिएटटिव टीम भी बेच दी है?

कौन अप्रूवल कर रहा है ऐसी स्क्रिप्ट?

क्या किसी को जेनुइनली ये कहानी एंगेजिंग लगी?

अगर फिल्म ‘सैयारा’ जैसा थीम और मूड क्रिएट करना चाहती थी, तो उसे इमोशनल डेप्थ पर भी उतना ही काम करना चाहिए था. यहां तक कि फिल्म का टाइटल ट्रैक भी फहीम अब्दुल्ला से गवाया गया है, और वो अच्छा भी लगता है, लेकिन सिर्फ अच्छे सॉन्ग्स किसी फिल्म को इमोशनली मेमोरेबल नहीं बना सकते.

‘चांद मेरा दिल’ रिव्यू फाइनल वर्डिक्ट

अगर कहानी और डायरेक्शन वीक थे, तो एडिटिंग कम से कम बेहतर कर सकते थे. कई सीन्स अननेसेसरी लंबे लगते हैं और फिल्म इमोशनल होने के बजाय थकाऊ लगने लगती है. यही वो फिल्में हैं जिन्हें देखने के बाद ऑडियन्स थिएटर से निकलकर बोलती है, कि बॉलीवुड के पास अब नई स्टोरीज नहीं बची हैं.

हां, फिल्म का म्यूजिक अच्छा है. सचिन-जिगर का साउंड ट्रैक और अमिताभ भट्टाचार्य के लिरिक्स कई जगह असर छोड़ते हैं, लेकिन आखिर में ‘चांद मेरा दिल’ एक ऐसी फिल्म बनकर रह जाती है, जिसमें अच्छी एक्टिंग और अच्छा म्यूजिक तो है, लेकिन इसके अलावा सब खाली और घिसा पिटा है.

First published on: May 22, 2026 12:42 PM

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