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कौन थे राज सिंह डूंगरपुर? जिनकी खातिर ताउम्र कुंवारी रहीं लता मंगेशकर!

भारतीय संगीत की 'स्वर कोकिला' लता मंगेशकर ने अपनी सुरीली आवाज से करोड़ों लोगों को अपना दीवाना बनाया, लेकिन उनकी अपनी निजी जिंदगी एक ऐसे प्रेम कहानी की गवाह रही जिसे दुनिया आज भी सम्मान के साथ याद करती है. लता मंगेशकर और राज सिंह डूंगरपुर की प्रेम कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जिसमें प्यार था, लेकिन मंजिल नहीं. दोनों एक-दूसरे से बेइंतहा मोहब्बत करते थे, लेकिन पारिवारिक और सामाजिक बंदिशों के कारण वे कभी एक न हो सके. यह कहानी त्याग और सच्चे प्यार की एक ऐसी मिसाल है जो आज भी लोगों को भावुक कर देती है.

राज सिंह डूंगरपुर कौन थे? - राज सिंह डूंगरपुर डूंगरपुर के महाराज महारावल लक्ष्मण सिंह के सबसे छोटे पुत्र थे. उनका दिल क्रिकेट में बसता था. उन्होंने रणजी और दुलीप ट्रॉफी खेलने के बाद भारतीय टीम का प्रबंधन संभाला और साल 1990 में बीसीसीआई (BCCI) के अध्यक्ष पद तक पहुंचे.

पहली मुलाकात- इनकी मुलाकात लता जी के भाई हृदयनाथ मंगेशकर के जरिए हुई, जो राज सिंह के करीबी दोस्त थे. कहा जाता है कि दोनों का मिलना एक 'लव एट फर्स्ट साइट' जैसा था. राज सिंह उन्हें इंडिया में होने वाले हर बड़े क्रिकेट मैच की फ्री टिकट उपलब्ध कराते थे.

परिवार की दीवार- जब प्यार परवान चढ़ा, तो परिवार का विरोध सामने आया. राज सिंह के राजपुताना घराने का सख्त नियम था कि बहू राजघराने से ही हो, जबकि लता जी के माता-पिता चाहते थे कि वे किसी मराठी परिवार में ब्याही जाएं. राज सिंह ने घरवालों को मनाने की खूब कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे.

दोनों ने चुना आजीवन साथ न रहना- राज सिंह ने 2004 में एक इंटरव्यू में इसे स्वीकार किया था. उन्होंने कहा था कि वे अलग बैकग्राउंड से थे और उस समय (60 का दशक) का दौर आज जैसा नहीं था. उन्होंने कहा, "यह ऐसा था जो होना नहीं लिखा था." प्यार कम नहीं हुआ, लेकिन दोनों ने कभी शादी नहीं की.

सच्चा प्यार, जो मौत तक रहा- दोनों ने ताउम्र एक-दूसरे का सम्मान किया. राज सिंह डूंगरपुर का 2009 में अल्जाइमर जैसी बीमारी से लड़ते हुए निधन हो गया, और लता जी ने हमेशा उनके प्रति अपनी निष्ठा और प्यार बनाए रखा. वे दोनों एक-दूसरे के लिए 'जीवन भर का साथ' निभाने की कसमें खाकर भी अलग रहे, जो आज के समय में दुर्लभ है.