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‘बॉलीवुड में भी कास्ट सिस्टम’, Panchayat की इस एक्ट्रेस ने खोली फिल्म इंडस्ट्री की पोल, बोले-‘सेट पर 3 कैटेगरी….’
बॉलीवुड इंडस्ट्री में अक्सर देखा जाता है कि किसी भी फिल्म की सारी लाइमलाइट उसके लीड एक्टर्स बटोर लेते हैं, जबकि सपोर्टिंग और छोटे किरदार निभाने वाले कलाकारों को वह सम्मान नहीं मिल पाता, जिसके वे हकदार होते हैं. चकाचौंध से भरी फिल्म इंडस्ट्री दूर से जितनी खूबसूरत दिखती है, उसकी हकीकत कई बार इससे बिल्कुल अलग होती है. कई एक्टर और एक्ट्रेस समय-समय पर अपने साथ होने वाले भेदभाव को लेकर खुलकर बात कर चुके हैं. हाल ही में 'पंचायत' में क्रांति देवी का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री सुनीता राजवार और टीवी कलाकार जतिन नेगी ने भी इंडस्ट्री से जुड़े कई अनुभव साझा किए हैं.
इंडस्ट्री के भेदभाव पर बोली सुनीता राजवार और जतिन नेगी
दरअसल, हाल ही में Screen को दिए एक इंटरव्यू में सुनीता राजवार और जतिन नेगी ने फिल्म इंडस्ट्री में होने वाले भेदभाव पर खुलकर बात की. जतिन नेगी 2021 में रिलीज हुई फिल्म 'बेल बॉटम' में नजर आए थे. इसके अलावा उन्होंने योगी आदित्यनाथ की जिंदगी पर आधारित फिल्म 'अजय' में विलेन की भूमिका निभाई थी. जतिन ने कहा, "कैरेक्टर आर्टिस्ट को आमतौर पर वह सम्मान नहीं मिलता, जब तक वे परेश रावल या अनुपम खेर जैसे बड़े कलाकार न हों. सेट पर मिलने वाली सुविधाएं भी आपके किरदार के हिसाब से तय होती हैं. बड़ी फिल्मों में लीड कलाकारों को चार वैनिटी वैन तक मिलती हैं, जबकि कैरेक्टर आर्टिस्ट को सिर्फ एक स्पॉट बॉय उपलब्ध कराया जाता है, जो उनका सामान संभालता है. कभी-कभी उनके पास मेकअप आर्टिस्ट भी होता है. अगर आप सीनियर कैरेक्टर आर्टिस्ट हैं, तो आपको अलग वैनिटी वैन मिल सकती है, वरना उसे दूसरे कलाकारों के साथ साझा करना पड़ता है. बैकग्राउंड कलाकारों को अक्सर सात से आठ लोगों के साथ एक ही वैनिटी वैन शेयर करनी पड़ती है. यानी, आपको कितना सम्मान मिलेगा, यह काफी हद तक आपके किरदार पर निर्भर करता है."
पंचायत की सुनीता राजवार ने भी खोला राज
इसी दौरान 'पंचायत' और 'गुल्लक' जैसी वेब सीरीज में नजर आ चुकी सुनीता राजवार ने भी इंडस्ट्री में होने वाले भेदभाव पर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि सेट पर लीड कलाकारों और कैरेक्टर कलाकारों के बीच सुविधाओं और हैसियत में बड़ा अंतर होता है. उन्होंने कहा, "अगर किसी कलाकार को लीड रोल मिलता है, तो पूरा माहौल उसी के इर्द-गिर्द होता है. उसे बेहतर कमरा, अलग स्टाफ और सभी सुविधाएं मिलती हैं. लेकिन अगर आपका रोल छोटा है या आप सिर्फ एक-दो सीन अथवा दो-तीन दिनों के लिए शूटिंग कर रहे हैं, तो कई बार स्पॉट बॉय भी आपकी तरफ ध्यान नहीं देता."
चाय कॉफी के लिए कर दिया जाता था मना
जतिन ने आगे कहा, "एक बार मुझे पैसों की जरूरत थी और मैं एक बैकग्राउंड रोल कर रहा था. स्क्रिप्ट में मेरा नाम सिर्फ 'Man 1' लिखा था. अगर कोई हमसे खाने के लिए पूछ लेता, तो हम खुद को किस्मत वाला समझते थे. अगर हमने कभी चाय या कॉफी मांगी, तो वह भी कई बार नहीं मिलती थी."
तीन कैटेगरी में मिलता है कलाकारों को खाना
इस दौरान जतिन ने फिल्म सेट पर कलाकारों के लिए अलग-अलग श्रेणियों के आधार पर मिलने वाले खाने को लेकर भी बात की. उन्होंने बताया कि सेट पर कलाकारों को A, B और C कैटेगरी में खाना बांटा जाता है. उन्होंने कहा, "A कैटेगरी में लीड और सीनियर सपोर्टिंग कलाकार शामिल होते हैं, जबकि बैकग्राउंड या एक्स्ट्रा कलाकारों के लिए खाने का अलग सेक्शन होता है. यह देखकर मेरा दिल टूट जाता है. मुझे यह भेदभाव कभी पसंद नहीं आया. बड़े-बड़े प्रोडक्शन हाउस में भी ऐसा होता है. लीड कलाकार आमतौर पर निर्देशक के साथ बैठकर खाना खाते हैं, लेकिन यह बंटवारा सेट पर ऐसा माहौल बना देता है, जैसे कोई कास्ट सिस्टम हो."
C कैटेगरी को मिलती है कम अच्छा खाना
आखिर में जतिन ने बताया कि, " C कैटेगरी के कलाकारों को मिलने वाले खाने की गुणवत्ता में भी काफी अंतर होता है. उन्होंने कहा कि खाने के लिए तीन अलग-अलग सेक्शन बनाए जाते हैं और कलाकारों को बताया जाता है कि उन्हें किस सेक्शन से खाना लेना है. कई बार जूनियर कलाकारों को सेट से काफी दूर खाना दिया जाता है. उनके लिए बैठने की उचित व्यवस्था भी नहीं होती और उन्हें खड़े होकर ही खाना खाना पड़ता है."
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