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बॉलीवुड को वो सुपरस्टार, जिसने की 2 शादी; लेकिन तीनों बेटे आज भी हैं कुंवारे

दिवंगत सुपरस्टार विनोद खन्ना न केवल अपनी दमदार एक्टिंग के लिए याद किए जाते हैं, बल्कि उनकी निजी जिंदगी भी हमेशा चर्चा में रही है. उन्होंने 1971 में गीतांजलि खन्ना से शादी की थी, जिनसे उन्हें राहुल और अक्षय हुए, और बाद में 1990 में कविता खन्ना से शादी की, जिनसे साक्षी का जन्म हुआ. एक दिलचस्प बात यह है कि विनोद खन्ना के तीनों बेटे—अक्षय, राहुल और साक्षी—आज भी कुंवारे हैं. जहां समाज अक्सर शादी को एक अनिवार्य पड़ाव मानता है, वहीं खन्ना परिवार के ये तीनों बेटे अपनी सिंगल लाइफ को पूरी संतुष्टि के साथ जी रहे हैं.

विनोद खन्ना की दो शादियां और विरासत- विनोद खन्ना ने 1971 में गीतांजलि से पहली शादी की थी, जिनसे उन्हें दो बेटे राहुल और अक्षय हुए. 1985 में तलाक के बाद, उन्होंने 1990 में कविता खन्ना से दूसरी शादी की, जिनसे उन्हें एक बेटा साक्षी और बेटी श्रद्धा हुए. पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद, उनके तीनों बेटे शादी के बंधन से दूर रहना ही पसंद करते हैं.

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अक्षय खन्ना की अपनी सोच- अभिनेता अक्षय खन्ना ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है कि उन्हें अपनी आजादी सबसे अधिक प्रिय है. उनका मानना है कि शादी उनके जीवन में काफी बदलाव लाएगी और उनके फैसलों पर जो उनका नियंत्रण है, वो कम हो जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अपनी सिंगल लाइफ में इतने खुश हैं कि शादी की जिम्मेदारियों के लिए तैयार नहीं हैं.

राहुल खन्ना के क्यों नहीं की शादी?- अभिनेता और फैशन आइकन राहुल खन्ना भी उसी राह पर हैं. वे अपने काम और निजी जीवन में पूरी तरह संतुष्ट हैं. राहुल ने कभी भी समाज के दबाव में आकर शादी करने की कोशिश नहीं की. वे अकेले रहकर अपनी शर्तों पर एक शांत और खुशहाल जीवन बिताना पसंद करते हैं.

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साक्षी खन्ना की प्राथमिकताएं- विनोद खन्ना के छोटे बेटे साक्षी खन्ना ने भी फिल्म इंडस्ट्री में काम किया है. साक्षी ने अपनी जिंदगी को करियर और अपनी प्राथमिकताओं के हिसाब से ढाला है. वे भी शादी के बजाय अपने काम, अपनी हॉबीज और अपनी पर्सनल लाइफ को ही अपनी खुशी का जरिया मानते हैं.

समाज से हटकर अपनी शर्तों पर जीना- आज के दौर में जहां शादी को अक्सर सामाजिक सफलता का एक मानक माना जाता है, वहीं खन्ना परिवार के ये तीनों भाई उससे बिल्कुल अलग हैं. वे न केवल समाज की अपेक्षाओं से बेपरवाह हैं, बल्कि अपनी आजादी और व्यक्तिगत खुशी को सबसे ऊपर रखते हैं. वे समाज के ढर्रे पर चलने के बजाय अपनी शर्तों पर जीना बेहतर समझते हैं.

First published on: Apr 27, 2026 04:33 PM

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