Thursday, 23 July, 2026

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ट्रेनों में बेचीं टॉफियां, ड्राइवर की नौकरी की… संघर्षों से निकलकर ऐसे बना ये एक्टर बॉलीवुड स्टार

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हिंदी सिनेमा में जब भी बेहतरीन कॉमेडियन का जिक्र होता है, तो महमूद का नाम सबसे पहले लिया जाता है. अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग, अलग अंदाज और दमदार अभिनय से उन्होंने दशकों तक दर्शकों को खूब हंसाया, हालांकि फिल्मों में स्टार बनने से पहले उनकी जिंदगी संघर्षों से भरी रही. कभी घर चलाने के लिए उन्होंने ट्रेनों में टॉफियां बेचीं, ड्राइवर की नौकरी की और छोटे-मोटे काम करके अपना गुजारा किया.

बॉलीवुड से रहा नाता

29 सितंबर 1932 को मुंबई में जन्मे महमूद अली के पिता मुमताज अली अपने दौर के मशहूर अभिनेता थे. घर में फिल्मी माहौल जरूर था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि महमूद को सफलता आसानी से मिल गई. उन्हें अपनी पहचान बनाने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा.

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आसान नहीं रहा सफर

महमूद ने बचपन में ही फिल्मों में कदम रख दिया था. साल 1943 में रिलीज हुई फिल्म 'किस्मत' में उन्होंने बाल कलाकार के रूप में काम किया और अशोक कुमार के बचपन का किरदार निभाया. इसके बाद कई फिल्मों में छोटे-छोटे रोल मिले, लेकिन स्टारडम उनसे अभी भी दूर था.

ट्रेनों में बेची टॉफी

संघर्ष के दिनों में महमूद ने हर वह काम किया जिससे घर का खर्च चल सके. उन्होंने मुंबई की लोकल ट्रेनों में टॉफियां बेचीं, ड्राइवर की नौकरी की और फिल्मों में जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर भी काम किया.

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किससे की शादी

इसी दौरान वे अभिनेत्री मीना कुमारी के घर टेबल टेनिस सिखाने जाया करते थे. यहीं उनकी मुलाकात मीना कुमारी की बहन मधु से हुई. दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और साल 1953 में दोनों ने शादी कर ली. हालांकि शादी के बाद भी महमूद का संघर्ष खत्म नहीं हुआ और वे लगातार बेहतर मौके की तलाश में जुटे रहे.

इन फिल्मों से बनी पहचान

उनकी किस्मत तब बदली, जब फिल्म 'छोटी बहन' में उनके काम को दर्शकों ने खूब पसंद किया. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 'पड़ोसन', 'गुमनाम', 'बॉम्बे टू गोवा', 'भूत बंगला', 'कुंवारा बाप', 'हमजोली' और 'नौकर' जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा का सबसे पॉपुलर कॉमेडियन बना दिया.

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निर्माता और निर्देशक भी रहे एक्टर

बहरहाल, महमूद सिर्फ बेहतरीन अभिनेता ही नहीं, बल्कि निर्माता और निर्देशक भी थे. उन्होंने कई नए कलाकारों को आगे बढ़ने का मौका दिया. फिल्म 'बॉम्बे टू गोवा' में अमिताभ बच्चन को मुख्य भूमिका दिलाने और 'छोटे नवाब' के जरिए आर.डी. बर्मन को शुरुआती मौका देने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है.

कई सम्मान से भी नवाजे गए एक्टर

अपने शानदार करियर में महमूद को कई सम्मान मिले, जिनमें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी शामिल है. स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के चलते उन्होंने बाद में फिल्मों से दूरी बना ली. 23 जुलाई 2004 को अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में उनका निधन हो गया. संघर्ष से सफलता तक का उनका सफर आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बना हुआ है.

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First published on: Jul 23, 2026 02:21 PM

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