Monday, 1 June, 2026

---विज्ञापन---

Back

लता मंगेशकर नहीं, ये सिंगर गाने वाली थीं पंडित नेहरू के सामने ‘ए मेरे वतन के लोगो’, ऐन मौके पर कर दिया गया मना

देशभक्ति गीत 'ए मेरे वतन के लोगो' को लता मंगेशकर ने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के सामने गाया था. लेकिन क्या आपको पता है कि लता मंगेशकर से पहले एक मशहूर सिंगर इस गीत को पंडित नेहरू के सामने पेश करने वाली थीं. ऐन मौके पर उनसे ये गाना छीन लिया गया.

---विज्ञापन---

Suman Kolhapur

बॉलीवुड की मशहूर गायिका लता मंगेशकर ने अपने करियर में कई सुपरहिट गानें गाएं. उनकी सुरीली आवाज हर उम्र के श्रोता को मंत्रमुग्द कर देती है. लेकिन एक ऐसी सिंगर भी थीं, जो सीधे लता मंगेशकर को टक्कर देती थीं. ये वो सिंगर थीं जो लता मंगेशकर का सबसे मशहूर गीत ‘ए मेरे वतन के लोगों’ को सबसे पहले पंडित जवाहरलाल नेहरू के समक्ष गाने वाली थीं. लेकिन उनसे ये मौका छीनकर लता मंगेशकर को दे दिया गया था. आइए इनके बारे में जानते हैं.

मशहूर गायिका सुमन कल्याणपुर

हम बात कर रहे हैं हिंदी और मराठी फिल्मों की मशहूर गायिका सुमन कल्याणपुर की, जिनका 89 साल की उम्र में 31 मई 2026 को देहांत हो गया. सुमन कल्याणपुर ने कई सुपरहिट गानों को अपनी सुरीली आवाज से सजाया. इनमें ‘ना तुम जानों न हम’, ‘दिल गम से जल रहा है’, ‘मेरे संग गा’, ‘मेरे महबूब न जा’, ‘जो हम पे गुजरती है’, ‘बहना ने भाई की कलाई में’ आदि गाने शामिल हैं. उन्हें दूसरी लता भी कहा जाता था. उनकी आवाज कई हद तक लता मंगेशकर से मिलती थी. कई बार उनके चाहने वालों के लिए भी दोनों की आवाज में फर्क कर पाना मुश्किल होता है. दिलचस्प बात यह है कि लता मंगेशकर की आवाज से सजा गाना ‘ए मेरे वतन के लोगों’ पहले सुमन कल्याणपुर गाने वाली थीं. इसके बारे में उन्होंने खुद एक इंटरव्यू के दौरान खुलासा किया था.

---विज्ञापन---

पेंटर बनना चाहती थीं सुमन कल्याणपुर

सुमन कल्याणपुर का जन्म बांग्लादेश के ढाका में हुआ था, जो उस वक्त भारत का हिस्सा था. उनके पिता शंकर बाबू सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में काम करते थे. सुमन के अलावा शंकर बाबू के यहां पांच संतानें और हुईं. बच्चों की बेहतर पढ़ाई-लिखाई का सपना संजोकर शंकर बाबू परिवार के साथ 1943 में मुंबई चले आए. मुंबई में सुमन का रुझान बचपन से ही पेंटिंग और संगीत की तरफ था. ऐसे में सुमन पेंटर बनना चाहती थीं, लेकिन उनके पिता के दोस्त पंडित केशव राव ने सुमन के अंदर एक गायिका देखा और इस तरह सुमन संगीत की दुनिया में आ गईं.

suman kalyanpur

संगीतकार नौशाद ने दिया बड़ा ब्रेक

सुमन कल्याणपुर को मराठी फिल्म ‘शुक्राची चांदनी’ में पहली बार गाने का मौका दिया गया. मगर, ये गाना फिल्म में शामिल नहीं हुआ. लेकिन, संगीतकार मोहम्मद शफी ने सुमन को फिल्म ‘मंगू’ (1954) में गाने के अवसर दिए. उस वक्त सुमन की उम्र महज 17 साल थी. इस फिल्म में भी सुमन के कई गाने निकाल दिए गए और सुमन का सिर्फ एक गीत फिल्म में रखा-‘कोई पुकारे धीरे से तुझे’. इसी साल संगीतकार नौशाद के निर्देशन में फिल्म ‘दरवाजा’ में सुमन को पांच गीत गाने का मौका मिला, जिसके बाद सुमन ने इंडस्ट्री में मजबूती से अपने पैर जमाए.

---विज्ञापन---

‘ए मेरे वतन के लोगो’ को लेकर किया चौंका देने वाला खुलासा

एक इंटरव्यू के दौरान सुमन कल्याणपुर ने बताया था कि, ‘देशभक्ति गीत ‘ए मेरे वतन के लोगो’ को ‘पंडित जवारहलाल नेहरू के सामने गाने के लिए मुझे बुलाया गया था, रिहर्सल भी हुई थी, लेकिन मंच के पास पहुंचते ही मुझे इस गाने की बजाय दूसरा गाना गाने के लिए कहा गया. ‘ कल्याणपुर ने ये भी कहा कि इस बात का अब तक पता नही लगा कि आखिर यह गाना उनसे क्यों छीना गया? उन्होंने कहा था, ‘पंडित नेहरू के सामने ‘ए मेरे वतन के लोगो’ गीत गाने का मौका मिला तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा. लेकिन जब कार्यक्रम के दौरान गाना गाने के लिए मंच के पास पहुंची तो मुझे रोका गया और कहा गया कि वे इस गाने की बजाय दूसरा गाना गाएं. ये गाना मुझसे छीन लिया गया था, ये मेरे लिए बड़ा सदमा था. वो बात आज भी चुभती है.’

First published on: Jun 01, 2026 09:35 PM

Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 on Facebook, Twitter.

Sponsored Links by Taboola