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Ek Din Movie Review: इमोशन है, लेकिन दिल तक पहुंच नहीं पाती ये फिल्म

अगर आपने ओरिजिनल फिल्म देखी है, तो 'एक दिन' आपको डिसअपॉइंट कर सकती है, और अगर नहीं देखी है, तब भी निराशा होगी, बस थोड़ी कम.

Movie name:Ek Din
Director:Sunil Pandey
Movie Casts:Junaid khan, Sai Pallavi, Kunal Kapoor, Kavin Dave, Pragati Mishra

कल्ट फिल्मों का रीमेक बनाना एक अच्छा आइडिया जरूर है, लेकिन हर कहानी को नए देश, नए कल्चर और करंट सिनेरियो में उतारना उतना आसान नहीं होता. इस फिल्म को देखते हुए, एक सवाल बार-बार दिमाग में आता है. क्या सच में बॉलीवुड के पास अब ओरिजिनल कहानियों की कमी हो गई है?

यह फिल्म 2016 में आई थाई फिल्म One Day का ऑफिशियल रीमेक ह, और तुलना से बच पाना मुश्किल है.


कहानी: एक दिन का प्यार, जो हमेशा के लिए याद रहना चाहिए था


कहानी दिनेश और मीरा की है, जो एक ही ऑफिस में काम करते हैं. दिनेश एक इंट्रोवर्ट IT प्रोफेशनल है, जो मीरा से एकतरफा प्यार करता है, लेकिन अपनी भावनाएं जाहिर नहीं कर पाता. दूसरी तरफ, मीरा पहले से ही एक रिश्ते में है.

ऑफिस ट्रिप के दौरान ये सभी जापान जाते हैं. वहीं एक दिलचस्प मोड़ आता है. मीरा की याददाश्त एक दिन के लिए चली जाती है, और वो दो साल पीछे की जिंदगी में लौट जाती है. अगले दिन सब कुछ सामान्य हो जाएगा, लेकिन वो इस एक दिन को भूल जाएगी.

अब दिनेश के पास सिर्फ एक दिन है, अपने प्यार को जीने का… क्या वो इस मौके को इस्तेमाल कर पाएगा? और क्या ये रिश्ता उस एक दिन के बाद भी टिक पाएगा? यही फिल्म का बेसिक प्लॉट है.

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परफॉर्मेंस: साई पल्लवी का जादू, जुनैद की सादगी

फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी है इसकी एक्टिंग. Sai Pallavi अपनी पहली हिंदी फिल्म में बेहद खूबसूरत और नैचुरल लगी हैं. उनका girl next door वाला चार्म स्क्रीन पर साफ दिखता है. Junaid Khan ने एक शर्मीले, इंट्रोवर्ट लड़के के रोल में अच्छी परफॉर्मेंस दी है. उनकी सादगी और ईमानदारी किरदार को रियल बनाती है. वहीं, Kunal Kapoor ने भी अपने रोल में ठीक-ठाक असर छोड़ा है.

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जापान: सिर्फ लोकेशन नहीं, एक किरदार

फिल्म में जापान सिर्फ बैकड्रॉप नहीं है, बल्कि एक अहम किरदार की तरह सामने आता है. खूबसूरत लोकेशन्स और विजुअल्स फिल्म को एक अलग फील देते हैं, और कई जगह कहानी को सपोर्ट भी करते हैं.

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कमजोर कड़ियां: कहानी की पकड़ और म्यूजिक

फिल्म का फर्स्ट हाफ ठीक-ठाक है, जहां कहानी और किरदार सेट होते हैं, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, इसकी पकड़ ढ़ीली पड़ने लगती है. साई पल्लवी और जुनैद के बीच की केमिस्ट्री ऑर्गेनिक जरूर लगती है, लेकिन उसमें वो गहराई नहीं है, जो दर्शकों को पूरी तरह बांध सके, कुछ रोमांटिक सीन्स में बेहतर इमोशनल इम्पैक्ट डाला जा सकता था, लेकिन वो मौका हाथ से निकल जाता है.

म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर भी फिल्म की बड़ी कमजोरी है, कोई भी गाना या धुन ऐसी नहीं है, जो याद रह जाए या दिल को छू सके, जोकि इस तरह की रोमांटिक फिल्म के लिए बेहद जरूरी होता है.

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फाइनल वर्डिक्ट: फील-गुड का मौका, लेकिन मिस्ड कनेक्शन

ऐसी फिल्में आमतौर पर दिल को छू जाती हैं, आपको रुलाती हैं, और बार-बार देखने का मन करती हैं, लेकिन एक दिन उस इमोशनल कनेक्ट को बना नहीं पाती, जो इसे खास बना सकता था. यह फिल्म कल्ट नहीं है, लेकिन अगर आप Sai Pallavi के फैन हैं, तो एक बार जरूर देख सकते हैं.

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First published on: May 01, 2026 10:48 AM

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