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खलनायक बनने के लिए लगभग 2 महीने नहीं नहाया था ये एक्टर, कई सुपरस्टार्स पर पड़ा था भारी

राजकुमार संतोषी की फिल्म 'चाइना गेट' (1998) भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपनी विशाल स्टारकास्ट के लिए जानी जाती है, जिसमें अमरीश पुरी, नसीरुद्दीन शाह और ओम पुरी जैसे 14 दिग्गज कलाकार एक साथ थे. लेकिन इन दिग्गजों के बीच जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा, वह थे डाकू 'जगीरा' के किरदार में मुकेश तिवारी. फिल्म 'चाइना गेट' में मुकेश तिवारी का 'जगीरा' अवतार भारतीय सिनेमा के सबसे क्रूर विलेन्स में गिना जाता है. जिस फिल्म में इतने सारे अनुभवी सितारे हों, वहां अपनी पहचान बनाना किसी भी नए कलाकार के लिए बड़ी चुनौती थी. मुकेश तिवारी ने इस किरदार को निभाने के लिए जितनी मेहनत की, वह आज के दौर के एक्टर्स के लिए एक मिसाल है.

जाने के लिए नहीं था किराया- मुकेश तिवारी का संघर्ष जगीरा बनने से पहले ही शुरू हो गया था. जब उन्हें इस रोल का ऑडिशन देने के लिए बुलावा आया, तो उनके पास मुंबई जाने के लिए पैसों की कमी थी. उन्होंने एक दोस्त से पैसे उधार लिए और ऑडिशन देने पहुंचे.

50 दिनों का 'नो-बाथ' चैलेंज- एक खूंखार और जंगली डाकू का वास्तविक लुक पाने के लिए मुकेश तिवारी ने 50 दिनों तक स्नान नहीं किया था. उनका मानना था कि पसीने और गंदगी की असली परत ही उनके किरदार में वो 'जंगलीपन' लाएगी जो दर्शकों में दहशत पैदा करे.

सेट पर फैलती थी दुर्गंध- इतने दिनों तक न नहाने के कारण उनके शरीर से इतनी तेज दुर्गंध आती थी कि सेट पर मौजूद क्रू मेंबर्स को बार-बार परफ्यूम का सहारा लेना पड़ता था. उनके खौफनाक लुक और गंध का असर इतना था कि शूटिंग के दौरान एक बार एक घोड़ा भी बिदक गया था.

दिग्गजों के बीच बनाई पहचान- जिस फिल्म में अमरीश पुरी, नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी और डैनी जैसे मंझे हुए अभिनेता हों, वहां एक नए कलाकार का लोगों को डरा देना बहुत बड़ी उपलब्धि है. जगीरा की आंखों की चमक और उसका जंगलीपन आज भी दर्शकों के मन में डर पैदा कर देता है.

विलेन की परिभाषा बदली- 'शोले' के गब्बर के बाद अगर किसी विलेन ने डाकू के किरदार को नई परिभाषा दी, तो वो जगीरा ही था. मुकेश तिवारी ने इसे केवल एक एक्टिंग नहीं, बल्कि एक 'अनुभव' बना दिया था. फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट न रही हो, लेकिन 'जगीरा' आज भी सिनेमा के सबसे डरावने किरदारों में शुमार है.