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बॉलीवुड का वो बदनसीब एक्टर, जिसने एक साथ साइन की थीं 40 फिल्में; फिर लगा ‘मनहूस’ का ठप्पा
अपनी मासूमियत और नीली आंखों से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले जुगल हंसराज की कहानी बॉलीवुड के सबसे उतार-चढ़ाव भरे सफरों में से एक है. 80 के दशक के सबसे लोकप्रिय बाल कलाकार और फिर 'नेशनल क्रश' बनने वाले जुगल को एक समय इंडस्ट्री ने 'मनहूस' तक का टैग दे दिया था.
'मासूम' की शानदार शुरुआत- महज 10 साल की उम्र में जुगल ने नसीरुद्दीन शाह और शबाना आजमी जैसे दिग्गजों के सामने अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया था. एक क्रिकेटर का बेटा होने के बावजूद उन्होंने क्रिकेट के बजाय कैमरे को चुना और बाल कलाकार के रूप में अपनी एक अलग जगह बनाई.
'मोहब्बतें' और नेशनल क्रश का दौर- आदित्य चोपड़ा की फिल्म 'मोहब्बतें' में 'समीर' के किरदार ने जुगल को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया. शाहरुख खान और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े सितारों की मौजूदगी के बावजूद जुगल ने अपनी मासूम मुस्कान से दर्शकों का दिल जीत लिया और वे उस दौर के 'नेशनल क्रश' बन गए.
40 फिल्मों का वो 'शाप'- जुगल की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई थी कि प्रोड्यूसर्स ने उन्हें हाथों-हाथ लिया और उन्होंने 40 फिल्में साइन कीं. लेकिन दुर्भाग्य से इनमें से 30-35 फिल्में या तो ठंडे बस्ते में चली गईं या शूटिंग शुरू होने से पहले ही बंद हो गईं. इसी के बाद इंडस्ट्री ने उन्हें 'मनहूस' कहना शुरू कर दिया, जो उनके करियर के लिए घातक साबित हुआ.
निर्देशन और लेखन में नई पारी- जब अभिनय का रास्ता मुश्किल होने लगा, तो जुगल ने निर्देशन की ओर रुख किया. उन्होंने 'रोडसाइड रोमियो' (एनिमेटेड फिल्म) और 'प्यार इम्पॉसिबल' जैसी फिल्में बनाईं. इसके अलावा उन्होंने बच्चों के लिए किताबें भी लिखीं, जिससे उनकी रचनात्मकता दुनिया के सामने आई.
वर्तमान जिंदगी और वापसी- जुगल हंसराज अब अपनी पत्नी जैस्मीन के साथ न्यूयॉर्क में बस चुके हैं. हालांकि, फिल्मों के प्रति उनका प्यार खत्म नहीं हुआ है. हाल ही में उन्होंने इब्राहिम अली खान की फिल्म 'नादानियां' के जरिए वापसी की कोशिश की, जिसे लेकर दर्शकों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया रही.