बॉलीवुड में कई सितारों की एंट्री किसी प्लान के तहत हुई, तो कुछ की किस्मत ने अचानक ऐसा मोड़ लिया कि उन्हें बिना ज्यादा कोशिश के फिल्मों में मौका मिल गया. ऐसी ही दिलचस्प कहानी एक्ट्रेस ट्यूलिप जोशी की है. ट्यूलिप ने कभी एक्ट्रेस बनने का सपना नहीं देखा था और न ही फिल्म इंडस्ट्री में आने का कोई खास प्लान बनाया था, लेकिन एक शादी में जाना उनके लिए इतना खास साबित हुआ कि वहां से सीधे यशराज फिल्म्स की फिल्म का रास्ता खुल गया.
इस फिल्म से मिली पहचान
ट्यूलिप जोशी ने साल 2002 में रिलीज हुई फिल्म ‘मेरे यार की शादी है’ से बॉलीवुड में कदम रखा था. फिल्म में उनके साथ उदय चोपड़ा, जिम्मी शेरगिल और बिपाशा बसु जैसे कलाकार नजर आए थे. अपनी पहली ही फिल्म में ट्यूलिप की सादगी और मासूमियत ने दर्शकों का ध्यान खींच लिया था, लेकिन शायद कम ही लोग जानते हैं कि इस फिल्म तक पहुंचने के पीछे उनकी कोई लंबी प्लानिंग नहीं थी.

एक शादी ने बदल दी जिंदगी
ट्यूलिप जोशी की जिंदगी में बड़ा ट्विस्ट तब आया, जब वह फिल्ममेकर आदित्य चोपड़ा और पायल खन्ना की शादी में शामिल हुई थीं. बताया जाता है कि ट्यूलिप इस शादी में लड़की वालों की तरफ से पहुंची थीं. इसी दौरान आदित्य चोपड़ा की नजर उन पर पड़ी. इसके बाद उन्हें फिल्म के लिए स्क्रीन टेस्ट देने का मौका मिला. ट्यूलिप ने ऑडिशन दिया और उनका सिलेक्शन हो गया. इस तरह एक शादी में शामिल होने पहुंची ट्यूलिप की किस्मत ने ऐसी करवट ली कि उन्हें यशराज फिल्म्स जैसे बड़े बैनर की फिल्म मिल गई.

एक्ट्रेस नहीं, कुछ और करना चाहती थीं ट्यूलिप
11 सितंबर 1979 को मुंबई में जन्मीं ट्यूलिप जोशी ने पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 2000 में फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था. हालांकि, वह यह प्रतियोगिता नहीं जीत सकीं, लेकिन इसके बाद मॉडलिंग की दुनिया में उनके लिए रास्ते खुल गए. खास बात यह है कि उस समय भी उनका सपना एक्ट्रेस बनने का नहीं था. वह स्पोर्ट्स के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती थीं.

फिल्मों में कदम रखने के बाद ट्यूलिप ने अपनी हिंदी बेहतर करने के लिए ट्यूशन भी ली. ‘मेरे यार की शादी है’ के बाद वह ‘दिल मांगे मोर’ में शाहिद कपूर और आयशा टाकिया के साथ नजर आईं. इसके बाद उन्होंने ‘मातृभूमि: ए नेशन विदाउट वुमन’ जैसी गंभीर फिल्म में काम किया. फिल्म में उनके किरदार कल्कि को भी काफी सराहना मिली.
इसे कहते हैं डेस्टिनी
ट्यूलिप ने सिर्फ हिंदी सिनेमा तक खुद को सीमित नहीं रखा. उन्होंने तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और पंजाबी फिल्मों में भी काम किया. ‘मिशन 90 डेज’, ‘धोखा’, ‘सुपरस्टार’, ‘डैडी कूल’, जैसी फिल्मों में भी वह नजर आईं. यानी जिस लड़की ने कभी एक्ट्रेस बनने का सपना तक नहीं देखा था, उसकी एक शादी में हुई मुलाकात ने उसे बॉलीवुड के बड़े बैनर तक पहुंचा दिया.