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20 साल तक सिर्फ एक ही किरदार में नजर आया ये एक्टर, कभी बैंक में गिनता था दूसरों के पैसे

"कुछ तो गड़बड़ है, दया!", यह डायलॉग आज भी भारतीय टेलीविजन के सबसे फेमस डायलॉग्स में से एक है. शिवाजी साटम (Shivaji Satam) ने ACP प्रद्युम्न के रूप में जो विरासत छोड़ी है, वह टीवी जगत में किसी मिसाल से कम नहीं है. 20 सालों तक एक ही किरदार को इतनी शिद्दत से निभाना काबिले तारीफ है. हालांकि, इस रुतबे के पीछे एक बेहद साधारण इंसान की कहानी है. अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले शिवाजी साटम 23 साल तक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में बतौर कैशियर काम करते थे. फिजिक्स और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की पढ़ाई करने वाले शिवाजी साटम ने थिएटर से अपने सपनों को उड़ान दी और अंततः भारतीय टीवी के 'सबसे बड़े पुलिस वाले' बन गए.

बैंक काउंटर से कैमरे तक- शिवाजी साटम का जीवन किसी फिल्म से कम नहीं रहा. 23 वर्षों तक उन्होंने सेंट्रल बैंक में एक कैशियर की जिम्मेदारी निभाई. बैंक की नौकरी और अभिनय के प्रति जुनून के बीच उन्होंने तालमेल बिठाया और थिएटर के माध्यम से अपनी पहचान बनाई.

फिजिक्स और बिजनेस का बैकग्राउंड- वह केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि बेहद शिक्षित व्यक्ति हैं. उन्होंने फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया और फिर बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की डिग्री हासिल की. उनकी यही शैक्षणिक पृष्ठभूमि और अनुशासन उनके काम में भी झलकता है.

थिएटर से एक्टिंग की शुरुआत (1976)- 1976 में उन्होंने थिएटर के मंच से एक्टिंग की शुरुआत की थी. वे लंबे समय तक रंगमंच से जुड़े रहे, जिसने उन्हें अपनी आवाज, हाव-भाव और अभिनय में वह बारीकी सिखाई, जिसकी वजह से ACP प्रद्युम्न का किरदार इतना प्रभावशाली बन सका.

20 साल का अटूट सफर (CID)- 1998 में शुरू हुआ CID भारतीय टीवी इतिहास का सबसे लंबा चलने वाला क्राइम शो बना. शिवाजी साटम ने दो दशकों तक बिना थके, बिना बोर हुए इस रोल को निभाया. उन्होंने न केवल इस किरदार को जिया, बल्कि समय के साथ उसे और भी ज्यादा गंभीर और दिलचस्प बनाया.

नाम से ज्यादा पहचान- शिवाजी साटम की सबसे बड़ी जीत यह रही कि आज भी उन्हें 'शिवाजी' कम और 'ACP प्रद्युम्न' ज्यादा बुलाया जाता है. एक कलाकार के लिए इससे बड़ा सम्मान क्या हो सकता है कि वह पर्दे के उस पात्र का पर्याय बन जाए, जिसे उसने निभाया हो.