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आखिर किसके कहने पर भारत में बैन हुई दिलजीत दोसांझ की Satluj? सामने आई बड़ी वजह
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होते ही दिलजिल दोसांझ की बेहद चर्चित फिल्म Satluj को लेकर ऐसा भारी बवाल मचा है कि सरकार को तुरंत बड़ा कदम उठाना पड़ा है. तीन साल के लंबे इंतजार और सेंसर बोर्ड की कानूनी लड़ाई के बाद जब इस फिल्म को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उतारा गया, तो महज दो दिन के भीतर ही इसे अचानक बैन करके ओटीटी से हटा दिया गया. फिल्म के अचानक गायब होने से जहां एक तरफ एक्टर दिलजीत दोसांझ और डायरेक्टर हनी त्रेहान बेहद हैरान हैं, वहीं दूसरी तरफ मनोरंजन से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तहलका मच गया है. आइए जानते हैं इस बैन के पीछे की असली और चौंकाने वाली वजह...
रिलीज के दो दिन बाद ही जी5 से हटाई गई फिल्म
मशहूर एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) की नई फिल्म 'सतलुज' (Satluj) को बीते 3 जुलाई 2026 को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 (ZEE5) पर रिलीज किया गया था. लेकिन रिलीज के महज दो दिन बाद ही इसे अचानक प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है. ओटीटी प्लेटफॉर्म ने इसके लिए दर्शकों से माफी मांगते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया और बताया कि अगले आदेश तक भारत में फिल्म 'सतलुज' की स्ट्रीमिंग पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है.
ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर है आधारित
इस फिल्म की कहानी पंजाब के मशहूर ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा (Jaswant Singh Khalra) के वास्तविक जीवन और उनके संघर्षों पर आधारित है. जसवंत सिंह ने साल 1984 से 1994 के बीच पंजाब के हालातों के दौरान हजारों लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार के सच को सामने लाने की बड़ी जांच की थी. साल 1995 में उनका अपहरण कर लिया गया था और बाद में उनकी हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद साल 2005 में कोर्ट ने पंजाब पुलिस के चार अफसरों को इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
सरकारी अधिकारी ने बताई बैन के पीछे की कानूनी वजह
एक सरकारी अधिकारी ने पीटीआई (PTI) से बातचीत में बताया कि मेकर्स ने साल 2022 में इस फिल्म को उसके ओरिजिनल टाइटल 'पंजाब 95' (Punjab 95) के नाम से सेंसर बोर्ड (CBFC) के पास भेजा था. तब सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 127 कट्स लगाने का सुझाव दिया था, जिसे मेकर्स ने मानने से इनकार कर दिया था. इसके बाद मेकर्स ने उन कट्स को लागू किए बिना ही चुपचाप नाम बदलकर 'सतलुज' (Satluj) टाइटल के साथ इसे सीधे ओटीटी पर रिलीज कर दिया. जब यह मामला सरकार के संज्ञान में आया, तो सुरक्षा कारणों और नियमों के उल्लंघन को देखते हुए मध्यस्थ दिशानिर्देशों के तहत इसे तुरंत हटाने का निर्देश दिया गया.
डायरेक्टर हनी त्रेहान को नहीं पता किसे थी दिक्कत
फिल्म 'सतलुज' के अचानक बैन होने से इसके डायरेक्टर हनी त्रेहान (Honey Trehan) भी काफी सदमे में हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें सच में नहीं पता कि इस फिल्म से किसे परेशानी थी क्योंकि उनके सामने कभी कोई नाम या चेहरा नहीं आया और जो भी बातें हुईं वे वकीलों और थर्ड पार्टी के जरिए ही हुईं. हालांकि उन्होंने आगे कहा कि उनके मन में देश चलाने वाले लोगों के प्रति कोई कड़वाहट नहीं है क्योंकि उनकी जिम्मेदारियां बहुत बड़ी होती हैं और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कभी-कभी वे भी बेबस हो जाते हैं.
दिलजीत दोसांझ के फिल्मों के चुनाव पर एफडब्लूआईसीई ने उठाए सवाल
इस बड़े विवाद पर फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (FWICE) के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने दिलजीत दोसांझ पर ही निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि दिलजीत पंजाब के एक बहुत बड़े ग्लोबल सुपरस्टार हैं और उनके लाखों फैंस हैं, ऐसे में उन्हें पैसों या किसी और वजह से ऐसी विवादित फिल्मों का चुनाव करने से बचना चाहिए जो समाज में तनाव पैदा करें. वहीं दिलजीत ने सोशल मीडिया लाइव पर कहा कि उन्हें पहले से पता था कि फिल्म को सोमवार तक हटा दिया जाएगा और यही वजह थी कि उन्होंने इस फिल्म को बिना किसी प्रमोशन के गुपचुप तरीके से अचानक ही रिलीज किया था ताकि यह कम से कम दो दिन के लिए ही सही पर जनता तक पहुंच सके.
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