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Drishyam से भी ज्यादा सस्पेंस-थ्रिलर वाली है 2 घंटे 16 मिनट की ये तगड़ी फिल्म, रहस्यों से भरी हुई है पूरी कहानी
अगर आपको सस्पेंस-थ्रिलर फिल्में देखना पसंद है और 'दृश्यम' (Drishyam) आपकी ऑल-टाइम फेवरेट रही है, तो आपके लिए ओटीटी पर एक और तगड़ी फिल्म आ चुकी है. 2 घंटे 16 मिनट की यह फिल्म रहस्यों और सस्पेंस से इस कदर भरी हुई है कि आप अंत तक कातिल का अंदाजा नहीं लगा पाएंगे. बॉलीवुड के दमदार एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी (Nawazuddin Siddiqui) एक बार फिर अपनी सुपरहिट फिल्म 'रात अकेली है' की विरासत को आगे बढ़ाते हुए एक जटिल और कड़क पुलिस ऑफिसर के अवतार में लौटे हैं.
कानपुर की बंसल हवेली का गहरा राज
फिल्म की पूरी कहानी बंसल परिवार के इर्द-गिर्द बुनी गई है. शहर का एक ऐसा रसूखदार परिवार जिसकी बंद दीवारों के पीछे कई घिनौने राज दफन हैं. हवेली में मर्डर होने के बाद जब जांच की आंच आगे बढ़ती है, तो परिवार का हर एक सदस्य शक के घेरे में आ जाता है.
मंझे हुए कलाकारों की टोली
नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने एक बार फिर अपनी सधी हुई और कड़क अदाकारी से पूरी फिल्म को अपने कंधों पर संभाला है. उनका साथ देने के लिए फिल्म में राधिका आप्टे, चित्रांगदा सिंह, दीप्ति नवल और संजय कपूर जैसे दिग्गज कलाकार मौजूद हैं, जिन्होंने अपनी परफॉर्मेंस से इसे एक पावरफुल ड्रामा बना दिया है.
सस्पेंस के साथ सामाजिक एंगल
भले ही यह फिल्म काल्पनिक है, लेकिन इसकी कहानी समाज की हकीकत के बेहद करीब लगती है. फिल्म के सस्पेंस में औद्योगिक दुर्घटनाओं (जैसे जहरीली गैस रिसाव) के गंभीर मुद्दे को जोड़ा गया है, जो इस मर्डर मिस्ट्री को एक सामाजिक एंगल देने के साथ-साथ और भी ज्यादा डरावना और दिलचस्प बनाता है.
बारीक और रियलिस्टिक पुलिस जांच
अगर आपको बिना किसी फालतू एक्शन या भागमभाग के, दिमागी खेल और सबूतों के सहारे आगे बढ़ने वाली पुलिस इन्वेस्टिगेशन पसंद है, तो यह फिल्म आपको बिल्कुल निराश नहीं करेगी. इसमें गवाहों के बयानों और बारीकियों के जरिए कातिल तक पहुँचने की प्रक्रिया को बहुत ही रीयलिस्टिक तरीके से दिखाया गया है.
सिस्टम और अमीरों के रसूख पर चोट
'द बंसल मर्डर्स' सिर्फ एक आम मर्डर मिस्ट्री नहीं है, बल्कि यह हमारे सिस्टम की कमियों, पैसे वालों के रसूख, कानून से खिलवाड़ और भ्रष्टाचार के गंदे खेल को भी पूरी तरह से बेनकाब करती है.