---विज्ञापन---
‘Dhurandhar’ से ज्यादा सस्पेंस वाली है ये स्पाई थ्रिलर फिल्म, क्लाइमेक्स है एकदम धमाकेदार

अगर आपको रणवीर सिंह की 'धुरंधर' और उसमें छिपे जासूसी के रोमांच ने प्रभावित किया है, तो आलिया भट्ट की मास्टरपीस फिल्म 'राजी' आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए. यह फिल्म केवल एक जासूसी कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसी जांबाज लड़की की दास्तां है जिसने वतन की हिफाजत के लिए अपनी पूरी दुनिया दांव पर लगा दी.

सच्ची घटना और उपन्यास पर आधारित- 'राजी' लेखक हरिंदर सिक्का के मशहूर उपन्यास 'कॉलिंग सहमत' (Calling Sehmat) पर आधारित है. यह कहानी 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान की एक सच्ची घटना से प्रेरित मानी जाती है, जिसमें एक कश्मीरी लड़की अंडरकवर एजेंट बनकर पाकिस्तान जाती है.

आलिया भट्ट का करियर-बेस्ट प्रदर्शन- मेघना गुलजार के निर्देशन में बनी इस फिल्म में आलिया भट्ट ने 'सहमत' का किरदार निभाया है. एक डरपोक लड़की से एक फौलादी जासूस बनने के सफर को आलिया ने अपनी अदाकारी से जीवंत कर दिया है. उनकी मासूमियत और उनके भीतर का द्वंद्व दर्शकों को भावुक कर देता है.

विक्की कौशल का सधा हुआ अभिनय- फिल्म में विक्की कौशल ने एक पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी (इकबाल सैयद) की भूमिका निभाई है. विक्की ने इस किरदार को इतनी शालीनता और गहराई से निभाया है कि दर्शक उनके प्रति भी सहानुभूति महसूस करने लगते हैं. आलिया और विक्की की केमिस्ट्री फिल्म को एक अलग स्तर पर ले जाती है.

जासूसी के पीछे का मानवीय दर्द- जहां 'धुरंधर' जैसी फिल्में एक्शन और मिशन पर केंद्रित होती हैं, वहीं 'राजी' जासूसी की दुनिया के मानवीय पहलू और उसके मानसिक बोझ को दिखाती है. यह दिखाती है कि एक जासूस को देश के लिए अपनी भावनाओं और रिश्तों की कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है.

देशभक्ति का एक नया नजरिया- यह फिल्म बिना किसी शोर-शराबे या नफरत के देशभक्ति का संदेश देती है. यह हमें याद दिलाती है कि सरहद पर लड़ने वाले सैनिकों के अलावा कई गुमनाम हीरो भी होते हैं, जिनके साहस के दम पर देश सुरक्षित रहता है.