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‘Panchayat’ से ज्यादा तगड़ी और दमदार है ये 5 एपिसोड वाली सीरीज, IMDb से मिली है 9.1 की धांसू रेटिंग

ओटीटी की दुनिया में शोर-शराबे और हिंसा के बीच 'गुल्लक' एक ताजी हवा के झोंके जैसी है. उत्तर भारत के एक छोटे से शहर के 'मिश्रा परिवार' की यह कहानी इतनी असली लगती है कि आपको लगेगा आप अपना ही घर देख रहे हैं. IMDb पर 9.1 की धांसू रेटिंग हासिल करने वाली यह सीरीज दिखाती है कि कैसे तंगी और छोटी-मोटी नोक-झोंक के बीच भी खुशियां ढूंढी जा सकती हैं. संतोष मिश्रा, शांति मिश्रा और उनके दो बेटों का यह सफर आपको हंसाएगा भी और भावुक भी कर देगा.

'पंचायत' से भी तगड़ी रेटिंग- जहां 'पंचायत' को दर्शक सिर आंखों पर बिठाते हैं, वहीं 'गुल्लक' ने IMDb पर 9.1/10 की अविश्वसनीय रेटिंग हासिल कर ली है. यह रेटिंग इस बात का सबूत है कि दर्शकों को संतोष मिश्रा और उनके परिवार की सादगी और ईमानदारी कितनी पसंद आ रही है. यह शो बिना किसी दिखावे के सीधे दिल में उतर जाता है.

मिडिल-क्लास परिवार की 'किस्सागोई'- यह सीरीज किसी काल्पनिक दुनिया की नहीं, बल्कि हम सबके घर की कहानी है. घर की मरम्मत, नौकरी की जद्दोजहद, बोर्ड एग्जाम का डर और मां-बाप की डांट—ये वो पहलू हैं जिन्हें 'गुल्लक' ने बहुत खूबसूरती से समेटा है. संतोष मिश्रा और शांति मिश्रा के बीच की नोक-झोंक इस शो की असली जान है.

बिंज-वॉच के लिए है एकदम परफेक्ट- अब तक 'गुल्लक' के कुल 4 सीजन आ चुके हैं. खास बात यह है कि हर सीजन में सिर्फ 5 एपिसोड होते हैं. यानी आप एक ही वीकेंड पर पूरा सीजन खत्म कर सकते हैं. छोटे एपिसोड और कसी हुई कहानी इसे बोरियत से कोसों दूर रखती है.

TVF का जादू और मंझे हुए कलाकार- 'द वायरल फीवर' (TVF) ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे छोटे शहरों की कहानियों के उस्ताद हैं. जमील खान, गीतांजलि कुलकर्णी, वैभव राज गुप्ता और हर्ष मेयर ने अपने किरदारों को इतना जीवंत बना दिया है कि वे आपको अपने पड़ोसी लगने लगेंगे. वहीं, सुनीता रजवार ने 'बिट्टू की मम्मी' बनकर कॉमेडी का जबरदस्त तड़का लगाया है.

गाली-गलौज से दूर, शुद्ध पारिवारिक शो- आजकल की वेब सीरीज में जहां हिंसा और गालियों की भरमार होती है, वहीं 'गुल्लक' एक साफ-सुथरा फैमिली ड्रामा है. इसे आप बिना किसी झिझक के बच्चों और बुजुर्गों के साथ देख सकते हैं. यह सीरीज आपको हंसाने के साथ-साथ कई बार आपकी आंखों को नम भी कर देगी.