Sita Sings the Blues: हाल ही में रणबीर कपूर की अपकमिंग फिल्म ‘रामायण’ का ट्रेलर आया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा और पसंद किया है. रणबीर की ‘रामायण’ ने एक बार फिर विवादित फिल्म ‘आदिपुरुष’ की याद दिया दी. ओम राउत के निर्देशन में बनी फिल्म ‘आदिपुरुष’ पर रामायण को गलत तरीके से पेश करने के इल्जाम लगे और इसे लेकर खूब विवाद भी हुआ. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘आदिपुरुष’ से कई सालों पहले, रामायण पर आधारित एक अमेरिकी एनिमेटेड फिल्म को लेकर इससे भी कहीं ज्यादा बड़ा हंगामा हुआ था?
एनिमेटेड फिल्म ‘सीता सिंग्स द ब्लूज’
जी हम साल 2008 में अमेरिकी एक्टर नीना पाले ने ‘सीता सिंग्स द ब्लूज’ नामक एक एनिमेटेड म्यूजिकल फिल्म बनाई. इस फिल्म को दुनिया की सबसे महान ब्रेक-अप कहानी के रूप में प्रमोट किया है. ये फिल्म रामायण का एक हल्का-फुल्का और फेमिनिस्ट दृष्टिकोण से किया गया रूपांतरण था. इस फिल्म को बनाने के लिए मेकर्स ने वेक्टर ग्राफिक्स, पारंपरिक भारतीय शैडो पपेट्स और राजपूत व पहाड़ी मिनीचर पेंटिंग्स से प्रेरित 2D कला शैली का उपयोग किया. इसके बैकग्राउंड में 1920 के दशक की मशहूर जैज सिंगर एनेट हंसशॉ के गाने इस्तेमाल किए गए थे. नीना पाले ने इसे सत्य, न्याय और एक महिला द्वारा समानता के अधिकार की मांग करने वाली कहानी बताया था. लेकिन फिल्म को काफी आलोचना भी झेलनी पड़ी.
100% रेटिंग और हुआ भारी विरोध
मेकर्स ने इस फिल्म को 2009 में अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर मुफ्त डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराया था. उस दौर में जब इंटरनेट पर कंटेंट का वायरल होना बहुत बड़ी बात होती थी, तब ये फिल्म सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फ़ैल गई थी. फिल्म क्रिटिक्स ने इसकी अनूठी कहानी कहने की शैली और कलात्मक मिश्रण की जमकर सराहना की. कई वेबसाइट्स ने फिल्म को 100% रेटिंग दी. हालांकि इसके साथ ही फिल्म को भारी विरोध का भी सामना करना पड़ा. हिंदू जनजागृति समिति सहित कई संगठनों ने 2009 में इस फिल्म में भगवान राम के चित्रण को अपमानजनक बताते हुए इस पर पूरी तरह से बैन लगाने की मांग की और याचिकाएं दायर कीं.
किस लिए हुआ विरोध?
फिल्म को लेकर साल 2010 में दिए एक इंटरव्यू में नीना पाले ने कहा था, कि कई लोगों के लिए 1980 के दशक का दूरदर्शन वाला धारावाहिक ही एकमात्र सच है, और उससे अलग किसी भी प्रस्तुति को वे गलत मान लेते हैं. फिल्म का समर्थन करने वाले लोगों का तर्क था कि परंपरागत रूपांतरणों के विपरीत, ये एनिमेटेड फिल्म माता सीता के कष्टों, उनके दृष्टिकोण और उनके विचारों को एक नई आवाज देती है. वहीं विरोध करने वाले वर्ग का मुख्य ऐतराज यही था कि फिल्म में भगवान राम के चरित्र को पूर्ण या आदर्श रूप में दिखाने के बजाय अलग रोशनी में प्रस्तुत किया गया था.
फिल्म को लेकर जगह-जगह हुए प्रदर्शन
इस फिल्म को लेकर काफी विवाद भी हुआ. साल 2011 में अमेरिका के सैन जोस म्यूजियम ऑफ आर्ट में फिल्म की स्क्रीनिंग के बाहर प्रदर्शन किए गए. न्यूयॉर्क के स्टारलाइट मंडप और भारत में गोवा के आर्ट चैंबर सहित कई स्थानों पर इसके शो रद्द करने पड़े. फिल्म ‘सीता सिंग्स द ब्लूज’ आज भी ‘रामायण’ पर आधारित एक विवादित फिल्म के रूप में देखी जाती है.
महत्वपूर्ण बातें
- ‘सीता सिंग्स द ब्लूज’ साल 2008 में अमेरिकी फिल्ममेकर नीना पाले द्वारा बनाई गई एनिमेटेड म्यूजिकल फिल्म है, जो रामायण को सीता के नजरिए और फेमिनिस्ट दृष्टिकोण से पेश करती है.
- फिल्म में वेक्टर ग्राफिक्स, भारतीय शैडो पपेट्स और राजपूत-पहाड़ी मिनिएचर पेंटिंग्स से प्रेरित 2D कला शैली का इस्तेमाल किया गया है.
- फिल्म को क्रिटिक्स से शानदार प्रतिक्रिया मिली और कई वेबसाइट्स ने इसे 100% रेटिंग तक दी, लेकिन इसके साथ ही इसे धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपों का भी सामना करना पड़ा.
- हिंदू जनजागृति समिति समेत कई संगठनों ने फिल्म में भगवान राम के चित्रण पर आपत्ति जताई और 2009 में इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की.
- विवाद इतना बढ़ा कि अमेरिका और भारत में फिल्म की स्क्रीनिंग के खिलाफ प्रदर्शन हुए और कुछ जगहों पर इसके शो भी रद्द करने पड़े.
‘सीता सिंग्स द ब्लूज’ रामायण की कहानी को एक अलग नजरिए से देखने और खास तौर पर सीता के अनुभवों व भावनाओं को केंद्र में रखने की कोशिश थी. फिल्म की अनोखी एनीमेशन शैली और कहानी कहने के तरीके को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना मिली, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के चलते इसे बड़े विरोध का सामना भी करना पड़ा.
आज जब रणबीर कपूर की ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा है और लोग रामायण की अलग-अलग सिनेमाई प्रस्तुतियों की तुलना कर रहे हैं, ऐसे में ‘सीता सिंग्स द ब्लूज’ का जिक्र फिर दिलचस्प हो जाता है. ये फिल्म याद दिलाती है कि रामायण सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए इसके किसी भी नए रूपांतरण को लेकर प्रशंसा और विवाद—दोनों की गुंजाइश बनी रहती है.