Wednesday, 3 June, 2026

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क्या फिल्मों को अलविदा कह देंगे Manoj Bajpayee? एक्टर के दिया चौंकाने वाला बयान

Manoj Bajpai: दिग्गज अभिनेता मनोज बाजपेयी ने खुलासा किया है कि वे पिछले 10 वर्षों से कई बार अभिनय छोड़ने का मन बना चुके हैं. उन्होंने बताया कि डार्क और भारी किरदारों का उनकी मानसिक सेहत पर गहरा असर पड़ता है, जिससे वे थक जाते हैं और अब वे कुछ हल्का-फुल्का काम करना चाहते हैं.

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Manoj Bajpai: बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन और मंझे हुए अभिनेताओं में शुमार मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) ने हाल ही में अपने करियर और निजी जिंदगी को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने उनके फैंस को चौंका दिया है. ओटीटी (OTT) से लेकर बड़े पर्दे तक अपनी दमदार एक्टिंग का लोहा मनवाने वाले मनोज बाजपेयी ने कबूल किया है कि पिछले 10 सालों में कई बार उनके मन में एक्टिंग को हमेशा के लिए अलविदा कहने का ख्याल आया है. लगातार डार्क और संजीदा किरदार निभाने की वजह से होने वाली मानसिक थकावट को उन्होंने इसकी मुख्य वजह बताया है.

10 सालों से आ रहा है काम छोड़ने का ख्याल

मनोज बाजपेयी ने ईमानदारी से स्वीकार किया, “यार आपको सच बताऊं, लगभग 10 साल से बीच-बीच में मन करता है कि मैं एक्टिंग छोड़ दूं. लेकिन फिर अचानक कोई ऐसा शानदार रोल सामने आ जाता है, जिसे करने से मैं खुद को रोक नहीं पाता.” उन्होंने साफ किया कि वे सिर्फ दाल-रोटी कमाने के लिए बेमन से काम नहीं करना चाहते.

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डार्क किरदारों का मानसिक सेहत पर असर

‘गली गुलियां’, ‘अलीगढ़’ और ‘भोंसले’ जैसी फिल्मों में बेहद संजीदा रोल करने वाले मनोज ने कहा कि इन किरदारों का अंधकार आज भी उनके भीतर कहीं न कहीं मौजूद है. ऐसे रोल करने से मूड स्विंग्स (मूड बदलना) और भावनात्मक थकावट होती है, जिससे उबरने के लिए वे आध्यात्मिकता (Spirituality) का सहारा लेते हैं.

अब करना चाहते हैं ‘बकवास कॉमेडी’

इंटेंस सिनेमा से थक चुके मनोज बाजपेयी अब पूरी तरह से हल्के-फुल्के कमर्शियल एंटरटेनर की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. उन्होंने इच्छा जताई कि अब उनका मन एकदम स्लैपस्टिक और बकवास कॉमेडी करने का है, जहां गानों पर थोड़ा नाचना हो, सेट पर सिर्फ अच्छा समय बिताना हो और जिसके लिए दिमाग पर कोई बोझ न लेना पड़े.

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पिता के साथ वक्त न बिता पाने का मलाल

अपने सपनों को पूरा करने के सफर में खोई हुई चीजों पर बात करते हुए मनोज भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि मुंबई आने की वजह से वे अपने माता-पिता से दूर हो गए. उन्हें इस बात का मलाल है कि काश उन्हें अपने पिता के साथ बिताने के लिए थोड़ा और समय मिल जाता, तो वे एक-दूसरे को और बेहतर समझ पाते.

सफलता के बाद बलिदानों का अहसास

करियर में मिली बड़ी सफलताओं और मैटेरियलिस्टिक (भौतिक) खुशियों को हासिल करने के बाद जब मनोज बाजपेयी पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उन्हें लगता है कि जिंदगी में किए गए सारे बलिदान इसके लायक नहीं थे. अपनों से दूर रहने की कीमत पर मिली इस सफलता को देखकर कभी-कभी उनका मन उदास हो जाता है.

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First published on: Jun 03, 2026 09:52 AM

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