---विज्ञापन---
जब सुभाष घई की इस हरकत के कारण सुसाइड करना चाहता था ये 90s का एक्टर! वजह कर देगी हैरान

90 के दौर के तमाम ऐसे एक्टर और एक्ट्रेस हैं, जिन्होंने अपने साइड रोल से स्क्रीन पर शानदार छाप छोड़ी है. क्योंकि साइड रोल करने वाले एक्टर्स के बिना कोई भी फिल्म पूरी नहीं होती है. वैसे ही आज हम एक ऐसे ही एक्टर के बारे में बात करने जा रहे हैं, जो कि तमाम मूवीज में विलेन का रोल कर चुके हैं. हालांकि एक बार सुभाष घई की मूवी में काम किया था और उनकी एक हरकत के कारण वह सुसाइड तक करना चाहते थे. तो चलिए जानते हैं इनके बारे में.

दरअसल, हम जिस एक्टर के बारे में बात कर रहे हैं वो कोई और नहीं बल्कि गोविंद नामदेव हैं. जो कि अपनी बेहतरीन एक्टिंग के लिए जानते हैं. उन्होंने ओ माय गॉड, दम मारो दम, बैंडिट क्वीन, विरासत, सत्या, कच्चे धागे,मस्त, राजू चाचा, सरफरोश, कयामत जैसी कई फिल्मों काम किया है.

हालांकि उन्होंने सुभाष घई की फिल्म 'सौदागर' में भी काम किया है, जो कि 1991 में आई थी. लेकिन इस फिल्म से उनके किरदार को काट दिया गया था. जिसके बाद गोविंद नामदेव सुसाइड करना चाहते थे.

हाल ही में गोविंद नामदेव द लल्लनटॉप में इंटरव्यू के पहुंचे थे, जहां उन्होंने सौदागर और सुभाष घई द्वारा काटे गए अपने किरदार को लेकर बात की. उन्होंने बताया कि वह इसके कारण सदमे में चले गए थे.एक्टर ने बताया कि उन्हें फिल्म 'सौदागर' में अनुपम खेर की वजह से रोल मिला था. दोनों ही बैचमेट थे और सौदागर में शूटिंग दिखाने के लिए अनुपम में गोविंद नामदेव को सेट पर बुलाया था और इस दौरान एक रोल की बात चली तो अनुपम ने उस रोल के लिए सुभाष घई को गोविंद नामदेव का नाम सजेस्ट किया.

इंटरव्यू के दौरान गोविंद ने सौदागर में होने वाले अपने किरदार को समझाया कि वह किरदार एक टीजर का होता है, जो कि वॉयलेंस सिखाता है. उन्होंने बताया कि," जब मुझे फिल्म मिली, एक दिन शूटिंग की दो दिन शूटिंग की, सुभाष घई ने भी बहुत तारीफ की, तो मैंने सबको कह दिया कि दिलीप कुमार के साथ काम कर रहा हूं, राजकुमार के साथ काम कर रहा हूं. इसके बारे में मैंने माता को, पिता, बहनों, दोस्तों और सभी अपने लोगों को बता दिया कि मैं इन बड़े स्टार्स के साथ फिल्म कर रहा हूं.

एक्टर ने आगे बताया कि, "फिल्म पूरी हुई, फिल्म का पोस्ट प्रोडक्शन हुआ, उसके बाद डबिंग हुई, सभी की और मैं सोच रहा था कि डबिंग के लिए बुलाएं,लेकिन बुलाया नहीं. जब डबिंग खत्म हो गई तो, सुभाष घई के भाई प्रोडक्शन देख रहे थे अशोक घई और मैं उनके पास बार बार जाता था कि डबिंग के लिए नहीं बुलाया और उन्होंने कहा कि आप शाम को आना मैं आपको बताता हूं. फिर उन्होंने बताया कि फिल्म काफी बड़ी बन गई थी, 4.30 घंटे की हो गई थी और काटते काटते भी बहुत लंबी बन रही थी, तो समझ नहीं आ रहा था कि क्या करना है. फिर किसी ने सजेस्ट किया कि मेरे वाले किरदार को हटा दो तो 12 मिनट मिल जाएंगे. और जैसे ही उन्होंने बोला कि मेरा किरदार निकाल दिया तो मैं सुन्न हो गया.

एक्टर ने आखिर में कहा, " मेरे दिमाग में आया कि मैंने इतने लोगों को बोला है. लोग मुझे बहुत गंभीरता से लेते हैं, लेकिन मैं सोचता था कि लोग क्या सोचेंगे कि इसने फालतू में गप्प उड़ा दी कि मैं दिलीप साहब के साथ काम कर रहा हूं.उस वक्त मुझे चक्कर से आ गए. मैं उस वक्त दिमागी रूप से बिखर गया था. मैं दिनभर बियर पी रहा हूं, रातों को समुद्र के किनारे बैठे हैं. समझ नहीं आ रहा है क्या करें. अगर मेरी वाइफ नहीं तो हो सकता था कि मैं सुसाइड कर लेता. क्योंकि मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था कि लोग क्या कहेंगे, क्योंकि मैं तो दिखूंगा नहीं. पत्नी के गले लगकर रोता था." एक्टर जब अपना यह किस्सा सुना रहे थे तो उनकी आंखें भर आईं थी.