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वो दिग्गज जिसने कमल हासन को दिखाया ‘बदसूरत’, रजनीकांत से की 3000 रुपये की डील, दिलचस्प है इस डायरेक्टर की कहानी
Bharathiraja Death: भारतीय सिनेमा के दिग्गज फिल्ममेकर भारथीराजा का 10 जून 2026 को 84 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने सिर्फ तमिल सिनेमा ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा की सोच बदल दी. ग्रामीण कहानियों को बड़े पर्दे पर असली अंदाज में दिखाने वाले भारथीराजा को आज भी उनकी कल्ट फिल्म '16 वयथिनिले' के लिए याद किया जाता है.
भारथीराजा की कमल हासन से मुलाकात
साल 1977 में जब भारथीराजा अपनी फिल्म की कहानी लेकर कमल हासन के पास पहुंचे, तब उनका हुलिया किसी बड़े निर्देशक जैसा नहीं था. उन्होंने मैली धोती और सिकुड़ी हुई शर्ट पहन रखी थी, लेकिन उनकी कहानी में ऐसा दम था कि कमल हासन तुरंत प्रभावित हो गए. बाद में कमल ने खुद कहा था कि अगर उन्होंने उनके कपड़ों को देखकर फिल्म ठुकरा दी होती, तो शायद उनका करियर कुछ और होता.
भारथीराजा की सोच थी सबसे अलग
दिलचस्प बात यह है कि भारथिराजा ने फिल्म में कमल हासन को जानबूझकर पारंपरिक हीरो जैसा नहीं दिखाया. उन्होंने उनके बाल बढ़वाए, साधारण कपड़े पहनाए और एक गांव के युवक के किरदार में पेश किया. उनका मानना था कि हीरो का सुंदर दिखना जरूरी नहीं, बल्कि किरदार का असली लगना ज्यादा महत्वपूर्ण है.
रजनीकांत के करियर को दी पहचान
फिल्म में एक अहम भूमिका रजनीकांत ने भी निभाई थी. उस समय रजनीकांत सुपरस्टार नहीं बने थे. भारथीराजा ने उन्हें गांव के दबंग 'परट्टैयन' का रोल ऑफर किया. फीस को लेकर दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई. रजनीकांत ने पहले 5000 रुपये मांगे, फिर 4000 और आखिरकार करीब 3000 रुपये में बात तय हुई. यही फिल्म बाद में रजनीकांत के करियर की बड़ी पहचान बनी.
कैसे श्रीदेवी बनी फिल्म की मजबूत कड़ी
फिल्म की तीसरी मजबूत कड़ी थीं श्रीदेवी. उस वक्त उनकी उम्र महज 14 साल थी. भारथीराजा ने उन्हें बिना मेकअप के गांव की लड़की 'मयिल' के रोल में पेश किया. शूटिंग खत्म होने पर श्रीदेवी गांव और फिल्म यूनिट से बिछड़ने की वजह से रो पड़ी थीं. बाद में भारथिराजा ने ही उन्हें हिंदी फिल्म 'सोलहवां सावन' के जरिए बॉलीवुड में लॉन्च किया.
कितने बजट में बनी थी फिल्म?
करीब 5 लाख रुपये के बजट में बनी '16 वयथिनिले' ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की और 175 दिनों तक सिनेमाघरों में चली. इसी फिल्म ने कमल हासन, रजनीकांत और श्रीदेवी जैसे सितारों के करियर को नई ऊंचाई दी. भारथीराजा ने अपने पूरे करियर में साबित किया कि गांव, मिट्टी और आम लोगों की कहानियां भी बड़े पर्दे पर जादू बिखेर सकती हैं. यही वजह है कि उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली निर्देशकों में गिना जाता है.