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Netflix पर बवाल काट रही 7 एपिसोड वाली तगड़ी सस्पेंस थ्रिलर सीरीज , कहानी का हर एक सीन है दमदार

नेटफ्लिक्स पर अगर आप कुछ ऐसा ढूंढ रहे हैं जो आपको सस्पेंस, क्राइम और भरपूर कॉमेडी के साथ 90 के दशक की यादों में ले जाए, तो 'गन्स एंड गुलाब्स' (Guns & Gulaabs) से बेहतर कुछ नहीं हो सकता. 'द फैमिली मैन' और 'फर्जी' जैसे मास्टरपीस बनाने वाले राज एंड डीके की यह 7 एपिसोड की सीरीज ओटीटी पर धमाल मचा रही है. इसकी IMDb रेटिंग 7.7 है और यह 'ब्लैक कॉमेडी' का एक शानदार उदाहरण है.

कहानी का अनोखा ताना-बाना- सीरीज की कहानी अफीम के अवैध व्यापार और दो गिरोहों के बीच वर्चस्व की जंग पर टिकी है. लेकिन ट्विस्ट तब आता है जब एक सीधा-सादा मैकेनिक टीपू (राजकुमार राव) अनजाने में एक बड़े खूनी खेल में फंस जाता है. साथ ही, एक ईमानदार नारकोटिक्स अफसर (दुलकर सलमान) की एंट्री शहर में भूचाल ले आती है.

दमदार कलाकार- राजकुमार राव ने एक बार फिर साबित किया कि छोटे शहर के किरदारों में उनसे बेहतर कोई नहीं है. वहीं, दुलकर सलमान ने एक सख्त अफसर के रूप में अपनी धाक जमाई है. इन दोनों का तालमेल कहानी को बेहद रोमांचक बनाता है.

'4 कट आत्माराम' का खौफ- इस सीरीज की सबसे बड़ी चर्चा गुलशन देवैया के किरदार '4 कट आत्माराम' की है. लंबे बाल, अजीब अंदाज और शिकार करने का खौफनाक तरीका—आत्माराम ने विलेन के किरदार को एक नई परिभाषा दी है. उनके और आदर्श गौरव (छोटा गनु) के बीच के सीन्स आपको स्क्रीन से हटने नहीं देंगे.

'फर्जी' से भी ज्यादा सस्पेंस- कई दर्शक और समीक्षक मानते हैं कि 'गन्स एंड गुलाब्स' की पटकथा 'फर्जी' जैसी बड़ी हिट को भी कड़ी टक्कर देती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका सस्पेंस है, जो हर एपिसोड के अंत में आपको यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि "अब आगे क्या होगा?"

90 के दशक को सलाम- यह सीरीज 90 के दशक के बॉलीवुड को एक खूबसूरत श्रद्धांजलि है. खून-खराबे के बीच अचानक आने वाले कॉमेडी सीन्स आपको हंसने पर मजबूर कर देंगे. अपराध की क्रूरता और उस दौर की मासूमियत का मिश्रण इसे नेटफ्लिक्स पर सबसे बेहतरीन कंटेंट में से एक बनाता है.