Wednesday, 4 March, 2026

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Netflix पर मौजूद 2 घंटे 11 मिनट की जबरदस्त क्राइम थ्रिलर फिल्म, कहानी की हर कड़ी में है तगड़ा सस्पेंस

सच्ची घटनाओं से प्रेरित 'महाराज' दर्शकों को उस दौर में ले जाती है जहां अंधविश्वास और सत्ता का बोलबाला था. 2 घंटे 11 मिनट की यह फिल्म एक निडर पत्रकार करसनदास मूलजी के संघर्ष की कहानी है, जो समाज के एक प्रभावशाली धर्मगुरु के काले कारनामों का पर्दाफाश करने की हिम्मत करता है. जुनैद खान ने अपनी पहली ही फिल्म में एक बेहद गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिका चुनकर सबको हैरान कर दिया है. यह फिल्म न केवल एक कानूनी लड़ाई है, बल्कि सत्य और पाखंड के बीच का एक तीखा सस्पेंस ड्रामा है.

1862 का ऐतिहासिक 'लिबेल केस'- फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कहानी है, जो बॉम्बे के प्रसिद्ध 'महाराज लिबेल केस' पर आधारित है. यह देखना बेहद रोमांचक और सस्पेंस भरा है कि कैसे उस दौर में, जब तकनीक और सोशल मीडिया नहीं था, एक अकेला पत्रकार अपनी कलम की ताकत से एक शक्तिशाली साम्राज्य को चुनौती देता है. हर सीन के साथ विरोध और धमकियों का सिलसिला बढ़ता जाता है.

जुनैद खान का प्रभावशाली डेब्यू- करसनदास मूलजी के किरदार में जुनैद खान ने अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया है. उनकी सादगी और दृढ़ संकल्प दर्शकों को कहानी से जोड़ता है. एक नए कलाकार होने के बावजूद उन्होंने जिस तरह से दिग्गज कलाकारों के सामने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, वह उन्हें एक 'धुरंधर' अभिनेता की श्रेणी में खड़ा करता है.

जयदीप अहलावत का 'मैग्नेटिक' विलेन अवतार- फिल्म का सस्पेंस जयदीप अहलावत के इर्द-गिर्द बुना गया है. 'जदुनारायण जी महाराज' के रूप में उनकी चुप्पी और उनकी आंखों का खौफनाक आत्मविश्वास फिल्म में एक जबरदस्त तनाव (Tension) पैदा करता है. उनकी बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी इतनी सटीक है कि दर्शक उनके किरदार से नफरत करने पर मजबूर हो जाते हैं, जो एक बेहतरीन अभिनेता की पहचान है.

विचारधाराओं और तर्क की जबरदस्त जंग- सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा के निर्देशन में यह फिल्म केवल मारपीट वाले एक्शन पर नहीं, बल्कि 'तर्कों के एक्शन' पर आधारित है. फिल्म में जिस तरह से धर्म, आस्था और शोषण के बीच की महीन रेखा को दिखाया गया है, वह हर पल सस्पेंस बनाए रखता है. कोर्टरूम ड्रामा के दौरान होने वाली बहसें फिल्म की कड़ी को और मजबूत करती हैं.

वो क्लाइमैक्स जो न्याय की नई परिभाषा लिखेगा- फिल्म का आखिरी हिस्सा यानी कोर्टरूम का फैसला और उसके बाद का घटनाक्रम आपके रोंगटे खड़े कर देगा. जिस तरह से जुनैद का किरदार साक्ष्यों को इकट्ठा करता है और अंत में जो दलीलें दी जाती हैं, वह दिमाग घुमा देने वाली हैं. यह अंत केवल एक जीत नहीं, बल्कि समाज के नजरिए को बदलने वाला एक 'मास्टरस्ट्रोक' है.

First published on: Mar 03, 2026 09:35 PM

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