Bashir Badr Passes Away: मशहूर उर्दू शायर बशीर बद्र अब हमारे बीच नहीं रहे. उर्दू शायरी की दुनिया के लिए ये एक बेहद दुखद खबर है. आधुनिक गजल के बेमिसाल उस्ताद और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. बशीर बद्र काफी समय से बीमार चल रहे थे. वहीं गुरुवार को उन्होंने आखिरी सांस ली. उनके निधन की खबर सामने आते ही साहित्य, कला और उर्दू अदब से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ गई. बशीर बद्र अपनी बेतरीन शायरी के लिए जाने जाते थे. अपनी शायरी में बशीर मोहब्बत, जुदाई, अकेलेपन और जिंदगी के छोटे-छोटे दर्द को बेहद खूबसूरती से बयान करते थे.
बशीर बद्र की मौत का कारण?
उनके अचानक निधन की खबर ने हर शायर प्रेमी को निराश कर दिया है. बता दें मशहूर उर्दू शायर बशीर बद्र लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों और याददाश्त से जुड़ी समस्या डिमेंशिया से जूझ रहे थे. वो काफी समय से बीमार चल रहे थे और ऐसे में सार्वजनिक कार्यक्रमों से भी दूर हो गए थे. गुरुवार को भोपाल में इलाज के दौरान लंबी बीमारी की वजह से उनका निधन हो गया. भले ही अब बशीर बद्र इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनकी शायरी हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी. उनकी गजलें हमेशा लोगों को प्रेरित करती रहेंगी. बशीर के जाने से उर्दू अदब की दुनिया में एक ऐसा नुकसान माना जा रहा है, जिसकी भरपाई शायद ही कभी हो पाएगी.
आधुनिक उर्दू गजल के सबसे लोकप्रिय शायर
डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था. उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से बीए, एमए और पीएचडी की पढ़ाई पूरी की थी. इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में लेक्चरर के रूप में काम किया. फिर वो मेरठ कॉलेज में उर्दू विभाग के प्रमुख और लेक्चरर रहे, जहां उन्होंने लगभग 17 वर्षों तक शिक्षण कार्य किया. बशीर उर्दू, फारसी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा पर शानदार पकड़ रखते थे. कहा जाता है कि उन्होंने महज सात साल की उम्र से शायरी लिखना शुरू कर दिया था. उर्दू भाषा पर उनकी खास पकड़ थी. उन्हें कई बड़े सम्मान से नवाजा गया. बशीर बद्र को आधुनिक उर्दू गजल का सबसे लोकप्रिय और आसान भाषा में लिखने वाला शायर माना जाता है. उनके श्रोता उन्हें कभी नहीं भूल पाएंगे.