Chinmayi Sripada on Chiranjeevi’s statement: फिल्म इंडस्ट्री में ‘कास्टिंग काउच’ एक ऐसा कड़वा सच है, जिस पर अक्सर बहस होती रहती है. हाल ही में हैदराबाद के एक कार्यक्रम में दिग्गज अभिनेता चिरंजीवी ने कुछ ऐसा कह दिया जिससे विवाद खड़ा हो गया. उनके बयान के बाद सिंगर और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट चिन्मयी श्रीपदा ने मोर्चा खोल दिया है. चिन्मयी का कहना है कि बड़े सितारों द्वारा ऐसी समस्याओं को नजरअंदाज करना या इसे व्यक्तिगत अनुभव बताना उन महिलाओं के साथ नाइंसाफी है, जो हर दिन इस शोषण का सामना करती हैं.
चिरंजीवी ने क्या कहा था?
हैदराबाद में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान चिरंजीवी ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में ‘कास्टिंग काउच’ जैसी कोई चीज नहीं है. उन्होंने तर्क दिया कि हर इंसान का अनुभव अलग होता है और यह इंडस्ट्री एक ‘आईने’ की तरह है. आप जैसे हैं, यह आपको वैसा ही दिखाती है. उनके इस बयान का मतलब निकाला गया कि अगर किसी के साथ गलत होता है, तो उसमें कहीं न कहीं उसकी अपनी गलती या व्यवहार शामिल है.
चिन्मयी श्रीपदा का तीखा पलटवार
सिंगर चिन्मयी, जो भारत में ‘Me Too’ मूवमेंट का प्रमुख चेहरा रही हैं, उन्होंने चिरंजीवी की इस ‘आईना’ वाली बात को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि यह कहना कि इंडस्ट्री सिर्फ आपके व्यक्तित्व को दर्शाती है, असल में पीड़ितों पर ही दोष मढ़ने जैसा है. चिन्मयी ने साफ किया कि आज की लड़कियां पढ़ी-लिखी और समझदार हैं, वे अपनी सीमाएं जानती हैं, फिर भी रसूखदार लोग उनका फायदा उठाते हैं.
‘कमिटमेंट’ शब्द का खौफनाक सच
चिन्मयी ने इंडस्ट्री के एक खास कोड वर्ड ‘फुल कमिटमेंट’ का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि बाहर की दुनिया में इसका मतलब काम के प्रति समर्पण होता है, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में कुछ लोग इसका इस्तेमाल यौन संबंधों की मांग करने के लिए करते हैं. कई बार लड़कियां इसे पेशेवर समझकर हां कर देती हैं, लेकिन बाद में उन्हें असलियत पता चलती है. उन्होंने यह भी बताया कि कई महिलाओं को काम सिर्फ इसलिए नहीं मिलता, क्योंकि वे इस तथाकथित ‘कमिटमेंट’ के लिए तैयार नहीं होतीं.
मां साथ हो तब भी महिलाएं सुरक्षित नहीं
अपनी बात को मजबूती देने के लिए चिन्मयी ने गीतकार वैरामुथु के खिलाफ अपने पुराने आरोपों को फिर से दोहराया. उन्होंने कहा कि जब उनके साथ बदतमीजी हुई थी, तब उनकी मां भी उनके साथ थीं. उन्होंने भावुक होते हुए लिखा, “ऐसे ताकतवर पुरुषों के सामने मां या किसी अभिभावक का साथ होना भी मायने नहीं रखता, क्योंकि उन्हें अपनी पावर का घमंड होता है.”
बदली हुई इंडस्ट्री और बढ़ती चुनौतियां
चिन्मयी ने स्वीकार किया कि शायद चिरंजीवी के दौर में कलाकार एक-दूसरे का सम्मान करते होंगे, लेकिन आज के हालात अलग हैं. आज पावर का गलत इस्तेमाल और असुरक्षित माहौल महिलाओं के लिए बड़ी चुनौती है. उन्होंने इस बात पर भी दुख जताया कि शोषण करने वाले लोग आज भी बड़े मंचों पर सम्मानित हो रहे हैं, जबकि आवाज उठाने वाली महिलाओं को काम मिलना बंद हो जाता है.