---विज्ञापन---
अबू धाबी से वापस भारत लौंटी ईशा गुप्ता, एयरपोर्ट और होटल के हालातों के बारें में किया खुलासा

बॉलीवुड अभिनेत्री ईशा गुप्ता के लिए पिछला कुछ समय किसी डरावने सपने जैसा रहा. अबू धाबी में मिडल ईस्ट के संघर्षों के बीच वह एयरपोर्ट पर फंस गई थीं, जहां मिसाइल हमलों की खबरों ने हर तरफ अफरा-तफरी मचा दी थी. ईशा ने बताया कि कैसे एक पल में पूरा एयरपोर्ट बंद हो गया और अजनबी एक-दूसरे को दिलासा देने लगे. मौत के साये और अनिश्चितता के बीच ईशा एतिहाद की पहली कमर्शियल फ्लाइट से सुरक्षित दिल्ली पहुंचीं. उनकी यह आपबीती न केवल एक सर्वाइवल स्टोरी है, बल्कि संकट के समय एक देश के मैनेजमेंट की काबिलियत को भी दर्शाती है.

एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले का खौफ- ईशा ने बताया कि 28 फरवरी की दोपहर 1 बजे वह अबू धाबी एयरपोर्ट पर थीं, जब अचानक सब कुछ बंद कर दिया गया. मिसाइल हमलों की खबरें आने लगीं और किसी को नहीं पता था कि अगले मिनट क्या होगा. लोग अपने परिवारों को फोन कर रहे थे और चारों ओर केवल डर का माहौल था.

होटल मैनेजमेंट की मुस्तैदी- क्योंकि ईशा ने चेक-इन नहीं किया था, वे वापस होटल लौट गईं. उन्होंने वहां के स्टाफ की तारीफ करते हुए लिखा कि होटल मैनेजमेंट कल रात वाले कपड़ों में ही बिना सोए लगातार काम कर रहा था. भारी भीड़ और सिक्योरिटी अलर्ट के बावजूद वहां कोई अफरा-तफरी नहीं थी और हर गेस्ट का पूरा ध्यान रखा जा रहा था.

यात्रियों की मदद और कैश वितरण- ईशा ने उन यात्रियों के हवाले से बताया जो एयरपोर्ट के अंदर फंस गए थे, कि वहां पैसेंजर्स को खाने-पीने के लिए कैश दिया गया. घंटों इंतजार के बाद उन्हें उनका सामान वापस मिला और प्रशासन ने बसों के जरिए सभी को अलग-अलग होटलों में सुरक्षित पहुंचाने का इंतजाम किया.

ग्राउंड स्टाफ का धैर्य- संकट की इस घड़ी में एयरलाइन का ग्राउंड स्टाफ और एतिहाद की टीम बेहद मददगार साबित हुई. ईशा के मुताबिक, वे लगातार कॉल सेंटर और काउंटर पर उन सवालों के जवाब दे रहे थे जिनका शायद उन्हें खुद भी ठीक से पता नहीं था, फिर भी वे शांत रहकर यात्रियों की घबराहट दूर कर रहे थे.

पहली फ्लाइट से भारत वापसी- ईशा खुद को खुशकिस्मत मानती हैं कि उन्हें एतिहाद की पहली कमर्शियल फ्लाइट में जगह मिल गई, जो कल दोपहर दिल्ली के लिए रवाना हुई थी. उन्होंने लिखा कि एयरपोर्ट पूरी तरह चालू नहीं था, फिर भी स्टाफ ने पूरी ताकत झोंक दी थी. उनके अनुसार, यह संकट एक देश की 'रीढ़ की हड्डी' और उसकी ताकत को दिखाता है.