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15 मिनट में सिनेमाघरों से उतर गई थी इस बॉलीवुड एक्टर की फिल्म, महाफ्लॉप का लगा था ठप्पा

बॉलीवुड में ऐसे कई किस्से हैं जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगते. एक ऐसा ही दिलचस्प और थोड़ा दर्दनाक वाकया अभिनेता शक्ति कपूर के साथ जुड़ा है. विलेन के रूप में अपनी धाक जमाने वाले शक्ति कपूर ने एक बार 'हीरो' बनने का सपना देखा था, लेकिन उनका यह सपना महज 15 मिनट में ही चकनाचूर हो गया.

विलेन से हीरो बनने की चाहत- 80 के दशक में शक्ति कपूर अपनी खलनायिकी के लिए मशहूर हो चुके थे. उन दिनों विनोद खन्ना ने विलेन से हीरो बनकर सफलता की नई इबारत लिखी थी. विनोद खन्ना से प्रेरित होकर शक्ति कपूर को भी लगा कि उनका चेहरा मोहरा भी हीरो जैसा है और वे लीड रोल कर सकते हैं. इसी प्रेरणा ने उन्हें फिल्म 'जख्मी इंसान' में बतौर हीरो काम करने के लिए उकसाया.

12:00 बजे लगी और 12:15 बजे उतर गई- साल 1982 में आई फिल्म 'जख्मी इंसान' शक्ति कपूर के करियर का सबसे बड़ा 'जख्म' साबित हुई. खुद शक्ति कपूर ने एक इंटरव्यू में मजाकिया लहजे में बताया था कि यह फिल्म इतनी बड़ी 'हिट' थी कि दोपहर 12 बजे पर्दे पर लगी और सवा 12 बजे (मात्र 15 मिनट में) सिनेमाघरों से हटा दी गई. दर्शकों ने इसे सिरे से नकार दिया था.

सबको 'जख्मी' कर गई फिल्म- शक्ति कपूर के शब्दों में, "फिल्म का नाम तो 'जख्मी इंसान' था, लेकिन इसने मुझे, प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और डिस्ट्रीब्यूटर, सबको बुरी तरह जख्मी कर दिया." इस फिल्म के डिजास्टर होने के बाद शक्ति कपूर ने फिर कभी लीड हीरो बनने की हिम्मत नहीं की और वापस विलेन और कॉमेडी रोल की तरफ मुड़ गए.
मेकर्स के सामने गिड़गिड़ाने की नौबत- हीरो बनने के चक्कर में शक्ति कपूर ने कई विलेन के रोल ठुकरा दिए थे. जब 'जख्मी इंसान' महाफ्लॉप हुई, तो उनके पास काम की कमी हो गई. आलम यह था कि उन्हें वापस विलेन के रोल पाने के लिए फिल्म मेकर्स के पास जाकर गुहार लगानी पड़ी कि उन्हें दोबारा गद्दार और विलेन के किरदार दे दिए जाएं.
विलेन और कॉमेडियन के रूप में मिली अमर पहचान- भले ही बतौर हीरो उनकी पहली और आखिरी फिल्म फ्लॉप रही, लेकिन इसने शक्ति कपूर को उनकी असली ताकत का अहसास कराया. इसके बाद उन्होंने 'नंदू', 'क्राइम मास्टर गोगो' और 'बलमा' जैसे यादगार किरदारों से दर्शकों के दिलों में वो जगह बनाई जो शायद एक हीरो के तौर पर उन्हें कभी न मिलती.