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Netflix पर गर्दा उड़ा रही ये सस्पेंस थ्रिलर फिल्म, कहानी का हर सीन है एकदम धांसू

अगर आप ऐसी फिल्मों के शौकीन हैं जो अपनी धीमी रफ्तार से तनाव (Tension) पैदा करती हैं, तो नेटफ्लिक्स पर मौजूद ‘बारामूला’ आपके लिए एक 'मस्ट-वॉच' है. मानव कौल ने इस फिल्म में एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई है, जो कश्मीर के बारामूला इलाके में हो रही रहस्यमयी घटनाओं की जांच कर रहा है. फिल्म की कहानी अंधविश्वास, मानसिक द्वंद्व और अपराध के एक ऐसे चक्रव्यूह में फंसी है, जहां हर सीन के बाद सस्पेंस और गहरा होता जाता है. यह फिल्म न केवल डराती है, बल्कि सोचने पर मजबूर भी करती है.

कश्मीर की वादियों में छिपा एक डरावना सच- फिल्म की कहानी कश्मीर के बैकड्रॉप पर आधारित है, लेकिन यहाँ खूबसूरती से ज्यादा खौफ का अहसास है. बारामूला में हो रही कुछ अजीबोगरीब मौतें और उनके पीछे छिपे स्थानीय मिथक कहानी को एक अलौकिक (Supernatural) टच देते हैं. फिल्म का सस्पेंस इसी बात पर टिका है कि क्या ये घटनाएं इंसानी साजिश हैं या कुछ और.

मानव कौल का सधा हुआ और गंभीर अभिनय- मानव कौल हमेशा से अपनी 'अंडरस्टेटेड' एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं. इस फिल्म में एक उलझे हुए पुलिस ऑफिसर के रूप में उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है. उनके किरदार की अपनी कुछ आंतरिक लड़ाइयां भी हैं, जो जांच के साथ-साथ चलती रहती हैं. उनकी खामोशी और चेहरे के हाव-भाव फिल्म के रहस्यमयी माहौल को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं.

एली अवराम और सहायक कलाकारों का दमदार साथ- एली अवराम ने इस फिल्म में एक चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाई है, जो उनके पिछले किरदारों से बिल्कुल अलग है. फिल्म के बाकी कलाकारों ने भी स्थानीय कश्मीरी परिवेश और वहां के तनाव को बखूबी पर्दे पर उतारा है. किरदारों के बीच का संदेह दर्शकों को अंत तक यह सोचने पर मजबूर करता है कि 'असली विलेन' कौन है.

बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी और डार्क थीम- फिल्म का विजुअल ट्रीट बहुत ही 'धांसू' है. धुंधली सुबह, बर्फ से ढके पहाड़ और अंधेरी रातों के दृश्यों को जिस तरह फिल्माया गया है, वह फिल्म में एक निरंतर डर (Eerie feeling) बनाए रखता है. सिनेमैटोग्राफी कहानी के मिजाज के हिसाब से एकदम सटीक है, जो हर फ्रेम में सस्पेंस को जीवित रखती है.

वो क्लाइमैक्स जो सब कुछ पलट देगा- फिल्म का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट इसका अंत है. जब जांच अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँचती है, तो सामने आने वाला सच दर्शकों के होश उड़ा देता है. ‘बारामूला’ का क्लाइमैक्स पारंपरिक थ्रिलर फिल्मों की तरह नहीं है, बल्कि यह एक गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव छोड़ता है. कहानी का अंत जिस तरह से मोड़ा गया है, वह इसे एक आला दर्जे की मिस्ट्री फिल्म बनाता है.